Delhi पुरानी दिल्ली के मशहूर 'कबूतर मार्केट' की तंग गलियों में, जहाँ पंखों की फड़फड़ाहट आम बात है, एक जॉइंट रेड (संयुक्त छापेमारी) ने शहर के पक्षियों के व्यापार के एक डरावने पहलू को सामने लाया है। जामा मस्जिद के पास पाँच पालतू जानवरों की दुकानों से कुल 863 पक्षियों और जानवरों को बचाया गया; इनमें से सैकड़ों को कथित तौर पर बहुत तंग और गंदी जगहों पर रखा गया था। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने 'पीपल फॉर एनिमल्स' (PFA), 'वर्ल्ड वाइड एनिमल' और दिल्ली वन एवं वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर यह ऑपरेशन चलाया। इसमें 431 ऐसे पक्षी बरामद किए गए जिनकी शुरुआती पहचान संरक्षित, प्रतिबंधित या 'शेड्यूल्ड' प्रजातियों के तौर पर की गई है।
इनमें 183 रिंग-नेक्ड तोते, 72 प्लम-हेडेड तोते, 63 एलेक्जेंड्राइन तोते और 113 मुनिया पक्षी शामिल थे। वन्यजीव अधिकारियों ने 'वर्ल्ड वाइड एनिमल' के साथ मिलकर इन संरक्षित पक्षियों को ज़ब्त किया। बचाव अभियान सिर्फ़ संरक्षित प्रजातियों तक ही सीमित नहीं रहा। इसके अलावा 432 और पक्षी व जानवर भी मिले - जिनमें बजरीगर, कॉकटेल, लवबर्ड्स, गिनी पिग, ग्रे गिलहरी, सफ़ेद चूहे, खरगोश और पालतू पक्षी शामिल थे - जिन्हें पुलिस ने बहुत ज़्यादा भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर रखा हुआ पाया।
यह छापेमारी PFA को 9 अगस्त को मिली उस जानकारी के आधार पर की गई थी जिसमें कबूतर मार्केट की दुकानों पर संरक्षित वन्यजीवों की कथित अवैध बिक्री, उन्हें रखने और कैद करने की बात कही गई थी। इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, जामा मस्जिद पुलिस ने पशु कल्याण संगठनों और वन एवं वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पाँच दुकानों का संयुक्त निरीक्षण किया। इतनी बड़ी संख्या में बरामदगी ने अब मार्केट में पक्षियों और जानवरों के व्यापार के पीछे के संभावित सप्लाई नेटवर्क की ओर ध्यान खींचा है।
पाँच लोगों - इक़बाल खान, आकाश, कानी राम, मो. आदिल खान और राशिद खान - की पहचान आरोपियों के तौर पर की गई है। ये सभी कबूतर मार्केट से जुड़े हैं और कानून के तहत उनसे मुचलका भरवाया गया है। 10 अगस्त को जामा मस्जिद पुलिस स्टेशन में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।
अब जाँच इन पाँच दुकानों से आगे बढ़ रही है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये पक्षी और जानवर कहाँ से आए थे, उन्हें किसने पहुँचाया, किसने सप्लाई किया और आखिर उन्हें कहाँ भेजा जाना था। जांच करने वाले अधिकारी दूसरे सप्लायर, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी और पेट शॉप्स की संभावित भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। हालांकि, बचाए गए जानवरों के लिए सबसे ज़रूरी काम उनकी देखभाल और पुनर्वास है। क्रूरतापूर्ण स्थितियों में पाए गए 432 पक्षियों और जानवरों को PFA की देखरेख में रखा गया, जबकि संरक्षित पक्षियों को वन्यजीव अधिकारियों ने ज़ब्त कर लिया। यह रेड जामा मस्जिद पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर बिजेंद्र, महिला सब-इंस्पेक्टर सलोनी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद ने SHO और ACP दरियागंज की देखरेख में की।