New दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2026 को ‘महिला किसान अंतर्राष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद भारत में महिला किसानों की भूमिका और अधिकारों को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय किसान संघ की ओर से नई दिल्ली में ‘अखिल भारतीय महिला किसान-मजदूर सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है।इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज में महिला किसानों को एक किसान के रूप में पहचान दिलाना और खेती-किसानी से जुड़ी महिलाओं की समस्याओं, चुनौतियों और अधिकारों पर चर्चा करना है।
30 सितंबर को दिल्ली में होगा सम्मेलन
भारतीय किसान संघ के अनुसार, यह सम्मेलन बुधवार 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम (केडी जाधव) में आयोजित किया जाएगा।सम्मेलन में देशभर से बड़ी संख्या में महिला किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े मजदूर शामिल होंगे। इसमें विभिन्न राज्यों से आने वाली महिला प्रतिनिधियां खेती से जुड़े अपने अनुभव और समस्याएं साझा करेंगी।
महिला किसानों की भूमिका पर होगा जोर
भारतीय कृषि व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। खेतों में बुआई, रोपाई, फसल कटाई, पशुपालन और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों में महिलाएं लंबे समय से योगदान देती रही हैं।इसके बावजूद कई बार महिला किसानों की पहचान और उनके योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता।सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों की इसी भूमिका को सामने लाना और उन्हें कृषि क्षेत्र में उचित पहचान दिलाने पर चर्चा करना है।
खेती में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा
सम्मेलन के दौरान महिला किसानों की समस्याओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।कृषि कार्यों में महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें खेती के संसाधनों तक पहुंच, आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, बाजार व्यवस्था और सामाजिक पहचान जैसे मुद्दे शामिल हैं।कार्यक्रम में इन विषयों पर चर्चा कर समाधान के रास्तों पर विचार किया जाएगा।
देशभर से शामिल होंगी महिला किसान
भारतीय किसान संघ के अनुसार, सम्मेलन में देश के सभी राज्यों से हजारों की संख्या में महिला किसान-मजदूर हिस्सा लेंगी।इस आयोजन में महिला किसानों को एक साझा मंच मिलेगा, जहां वे अपने अनुभवों और समस्याओं को सामने रख सकेंगी।विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं खेती में अपनाई जा रही नई तकनीकों, स्थानीय अनुभवों और कृषि से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेंगी।
महिला सशक्तिकरण और कृषि विकास पर फोकस
महिला किसानों को मजबूत बनाना कृषि विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खेती के अलावा पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कृषि व्यवसायों में भी महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं।सम्मेलन के जरिए महिला किसानों की क्षमता, योगदान और अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र की पहल के बाद बढ़ा फोकस
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को ‘महिला किसान अंतर्राष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद दुनियाभर में महिला किसानों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को पहचान देना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है।भारत में भी महिला किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि कार्यों से जुड़ी हुई हैं।कई परिवारों में महिलाएं खेती के हर चरण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद जमीन के स्वामित्व, ऋण सुविधा और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में उन्हें कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।ऐसे में महिला किसानों की पहचान और अधिकारों पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सम्मेलन से उम्मीदें
अखिल भारतीय महिला किसान-मजदूर सम्मेलन के माध्यम से महिला किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया जाएगा।कार्यक्रम में खेती से जुड़े मुद्दों, महिला किसानों की स्थिति और उनके भविष्य को लेकर विचार-विमर्श होगा।इस सम्मेलन के जरिए महिला किसानों को एकजुट करने और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को और मजबूत बनाने का संदेश दिया जाएगा।
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