TMC के 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय का दावा किया, लोकसभा स्पीकर करेंगे समीक्षा

Update: 2026-06-15 06:11 GMT

Delhi दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रविवार को पार्टी के कम से कम 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर यह जानकारी दी कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

Trinamool Congress के इन बागी सांसदों के इस कदम को संसदीय इतिहास में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इन सांसदों के अनुसार, उनका समूह अब Nationalist Citizens Party of India में विलय कर चुका है, जिससे नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को संसदीय स्तर पर मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।



जानकारी के अनुसार, इस विलय से जुड़ी प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा लिया जाएगा। बताया गया है कि स्पीकर पहले सभी 20 सांसदों के हस्ताक्षरों और औपचारिक दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा करेंगे, जिसके बाद ही इस विलय को मान्यता दी जाएगी।

Om Birla इस पूरे मामले में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच करेंगे कि क्या यह विलय दलबदल कानून के तहत वैध माना जा सकता है या नहीं। संसदीय नियमों के अनुसार, किसी भी दल के सांसदों के समूह के विलय को तभी स्वीकार किया जाता है जब आवश्यक संख्या और शर्तें पूरी हों।

सूत्रों के अनुसार, यदि इस विलय को मंजूरी मिल जाती है, तो यह राजनीतिक रूप से बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे नई बनी पार्टी NCPI निचले सदन में NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है। साथ ही, NCPI को लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि NCPI का अब तक लोकसभा या विधानसभा में कोई भी प्रतिनिधि नहीं रहा है। ऐसे में 20 सांसदों का एक साथ जुड़ना इस पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय संसदीय राजनीति में दल-बदल की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक साबित हो सकता है। इससे आने वाले समय में विपक्ष और सत्ता दोनों खेमों में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी अंतिम निर्णय लोकसभा स्पीकर की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक यह मामला राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बना रहेगा।

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