नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी PG बिल्डिंग हादसे की जांच अब बेसमेंट में लंबे समय से चली आ रही पानी रिसाव की समस्या पर केंद्रित हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में पहले से पानी रिसने की शिकायत थी और इसी को ठीक करने के लिए काम चल रहा था।
पुलिस अब उस लेबर कॉन्ट्रैक्टर की तलाश कर रही है, जो बेसमेंट में रिसाव ठीक करने का काम कर रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मरम्मत का काम किस तरीके से किया जा रहा था और क्या इस दौरान इमारत के ढांचे में किसी तरह का बदलाव किया गया था।
बेसमेंट रिसाव को लेकर जांच तेज
जानकारी के अनुसार, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन की PG बिल्डिंग में बेसमेंट से जुड़ी समस्या काफी समय से थी।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि बेसमेंट में पानी का रिसाव रोकने के लिए कुछ काम कराया जा रहा था। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इस काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग गिरने की वजह केवल एक कारण नहीं हो सकती। इसलिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।
लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की जांच
पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में मरम्मत का काम संभाल रहा था। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि काम के दौरान किन तकनीकों और सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या बेसमेंट में किए गए किसी बदलाव का असर इमारत की मजबूती पर पड़ा।
जांच में निर्माण संबंधी दस्तावेज, मरम्मत कार्य की जानकारी और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
हादसे में हुई थी सात लोगों की मौत
सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
मृतकों में कई छात्र शामिल थे, जो दिल्ली में पढ़ाई और अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने आए थे।
इस घटना के बाद राजधानी में पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
MCD ने बढ़ाई सख्ती
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने साउथ जोन में निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है।
7 सितंबर के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, MCD के बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने वार्ड 160 में पांच रिहायशी संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
नगर निगम यह जांच कर रहा है कि कहीं अन्य इमारतों में भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी तो नहीं की जा रही।
रिहायशी इलाकों में होगी जांच
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन की नजर उन इलाकों पर है जहां बड़ी संख्या में PG और किराये की इमारतें संचालित होती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इमारतों की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है।
विशेष रूप से उन भवनों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां बेसमेंट, अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किए गए हैं।
बिल्डिंग सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने दिल्ली में भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी इमारत में बेसमेंट से जुड़ा काम बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए।
यदि मरम्मत या बदलाव के दौरान संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होती है तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
इसी वजह से अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सत्य निकेतन की बिल्डिंग में काम नियमों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं।
दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
पुलिस और नगर निगम की जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही, अवैध निर्माण या सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई होगी।