नई दिल्ली। फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित दुनिया के मशहूर पर्यटन स्थल **एफिल टावर** से जुड़ा विवाद अब भारत में भी चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में अब **कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके** ने प्रतिक्रिया देते हुए धर्म और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि धर्म को कुछ पुरुषों की सोच तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में कहा कि **"पिछड़ी सोच वाले पुरुषों को धर्म का कस्टोडियन नहीं बनने देना चाहिए।"** उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म का इस्तेमाल महिलाओं पर अपनी सोच थोपने और उनकी स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए करते हैं।
क्या है एफिल टावर विवाद?
यह विवाद उस समय सामने आया जब पेरिस के एफिल टावर पर एक हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल से हटाए जाने का आरोप लगा, जिसके बाद वहां कर्मचारियों और यूनियन की ओर से आपत्ति जताई गई।
मामला बढ़ने के बाद एफिल टावर का संचालन करने वाली संस्था **SETE** ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। संस्था ने माना कि ऐसी किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
अभिजीत दीपके ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल किसी की व्यक्तिगत आजादी या अधिकारों को सीमित करने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जो लोग धर्म के नाम पर महिलाओं के लिए नियम तय करने की कोशिश करते हैं, वे धर्म और समाज दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना था कि आधुनिक समाज में बराबरी और सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
फ्रांस में भी हुआ विरोध
एफिल टावर विवाद सामने आने के बाद फ्रांस में भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नेताओं और कर्मचारियों ने इस तरह की व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इसे अस्वीकार्य बताया। फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष येल ब्रौन-पिवेट ने भी कहा कि किसी भी मेहमान या प्रतिनिधिमंडल की मांग के कारण महिलाओं को उनके काम से अलग नहीं किया जाना चाहिए।
BAPS संस्था ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद **BAPS हिंदू मंदिर पेरिस** की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई। संस्था ने कहा कि इस घटना से किसी को असुविधा हुई है तो वह इसके लिए क्षमा मांगती है।
संस्था ने अपने बयान में आपसी सम्मान और सेवा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं और परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे महिलाओं की समानता और अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं।
अभिजीत दीपके के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है। उनके समर्थकों ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के पक्ष में आवाज बताया, जबकि कुछ लोगों ने उनके बयान पर आपत्ति भी जताई।
धर्म और आधुनिक सोच पर चर्चा
एफिल टावर विवाद ने एक बार फिर धर्म, परंपरा और आधुनिक समाज के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाना आज के समय की बड़ी चुनौती है।
जहां एक ओर लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को महत्व देते हैं, वहीं दूसरी ओर समानता और सम्मान जैसे मूल्यों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विवाद का असर
एफिल टावर जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल से जुड़ा विवाद केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है। यही वजह है कि इस मामले पर फ्रांस से लेकर भारत तक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर बहस जारी है और अलग-अलग पक्ष अपने-अपने विचार रख रहे हैं।
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