बिजनेस डेस्क: डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी बड़ी चिंता बन गए हैं। कई बार किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या साइबर अपराध की शिकायत में पैसे की लेन-देन की चेन में आया बैंक अकाउंट फ्लैग, होल्ड या फ्रीज हो सकता है। ऐसे में खाताधारक के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या खाते में मौजूद पूरा पैसा फ्रीज हो जाएगा? इसका जवाब हर मामले में एक जैसा नहीं है।
साइबर फ्रॉड की शिकायत के बाद जांच एजेंसियां संदिग्ध रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश करती हैं। यदि किसी खाते में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम पहुंची है तो बैंक को उस रकम पर रोक लगाने या खाते पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित निर्देश मिल सकते हैं।
क्या पूरा बैंक बैलेंस फ्रीज होगा?
जरूरी नहीं कि हर मामले में खाते में मौजूद पूरी रकम ही फ्रीज हो। कार्रवाई शिकायत, संदिग्ध लेन-देन की रकम और बैंक या सक्षम प्राधिकारी को मिले निर्देश पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में केवल विवादित रकम पर लियन या होल्ड लगाया जा सकता है, जबकि अन्य मामलों में खाते से डेबिट लेन-देन पर व्यापक रोक लग सकती है।
इसलिए ‘अकाउंट फ्लैग’, ‘लियन’, ‘डेबिट फ्रीज’ और ‘अकाउंट फ्रीज’ को एक ही चीज समझना सही नहीं है। आपके खाते पर वास्तव में कौन-सा प्रतिबंध लगा है, इसकी जानकारी बैंक से लिखित रूप में लेना बेहतर है।
बिना फ्रॉड किए भी क्यों फंस सकता है अकाउंट?
कई बार किसी व्यक्ति ने जानबूझकर कोई साइबर फ्रॉड नहीं किया होता, लेकिन उसके खाते में ऐसी रकम आ सकती है जो पहले किसी धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन से जुड़ी हो। जांच के दौरान पैसे की लेयरिंग या ट्रांसफर चेन को ट्रैक करते समय ऐसे खातों पर भी रोक लग सकती है।
ऐसी स्थिति में खाताधारक को बैंक स्टेटमेंट, संबंधित भुगतान का कारण, इनवॉइस, चैट, बिक्री का रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए, जिनसे रकम के वैध स्रोत की जानकारी दी जा सके।
अकाउंट फ्लैग होने पर क्या करें?
सबसे पहले अपनी बैंक शाखा या बैंक के आधिकारिक ग्राहक सेवा माध्यम से संपर्क करें। पता करें कि प्रतिबंध किस कारण और किस प्राधिकारी के निर्देश पर लगाया गया है। यदि साइबर अपराध की शिकायत से संबंधित संदर्भ या शिकायत संख्या उपलब्ध कराई जाती है तो उसे सुरक्षित रखें।
किसी अनजान व्यक्ति को ‘अकाउंट अनफ्रीज कराने’ के नाम पर पैसे न दें और OTP, PIN, CVV या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
यदि मामला साइबर फ्रॉड से संबंधित है तो आधिकारिक साइबर अपराध चैनल और संबंधित जांच अधिकारी से संपर्क करना पड़ सकता है। जटिल मामलों में कानूनी सलाह भी उपयोगी हो सकती है।
इसलिए साइबर फ्रॉड के कारण बैंक अकाउंट फ्लैग होने का मतलब हर स्थिति में पूरा बैंक बैलेंस फ्रीज होना नहीं है। वास्तविक प्रतिबंध शिकायत और संबंधित प्राधिकारी के निर्देश पर निर्भर करता है।
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