महंगाई का बढ़ सकता है दबाव कमजोर मॉनसून से खाने पीने की चीजों पर खतरा
मौसम खाद्य कीमतें बढ़ने की आशंका
बिजनेस डेस्क: आने वाले दिनों में आम लोगों की रसोई का बजट बढ़ सकता है। कमजोर मॉनसून और अल नीनो (El Niño) जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। अगर प्रमुख फसल उत्पादक इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो अनाज, दाल, सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर खुदरा बाजार में कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
भारत की खेती का एक बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश से प्रभावित होता है। खासकर खरीफ सीजन में धान, दालें, मक्का, सोयाबीन और दूसरी फसलों के लिए समय पर और पर्याप्त बारिश महत्वपूर्ण होती है। केवल पूरे देश में हुई कुल बारिश ही नहीं, बल्कि बारिश का क्षेत्रवार और समय के अनुसार वितरण भी फसल के लिए अहम होता है।
कम बारिश से कैसे बढ़ती है महंगाई?
यदि किसी प्रमुख कृषि क्षेत्र में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है तो बुवाई और फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उत्पादन कम होने पर बाजार में उपलब्धता घटने का खतरा रहता है। मांग बनी रहने और आपूर्ति कम होने की स्थिति में कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
सब्जियों की कीमतों पर मौसम का असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। टमाटर, प्याज और दूसरी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की सप्लाई बारिश, गर्मी, बाढ़ और परिवहन संबंधी बाधाओं से प्रभावित हो सकती है। हालांकि किसी एक मौसम संबंधी घटना से सभी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।
अल नीनो क्यों है महत्वपूर्ण?
अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर प्रभाव पड़ सकता है। भारत में कुछ वर्षों में अल नीनो को कमजोर मानसून से जोड़ा गया है, लेकिन हर अल नीनो वर्ष में सूखा पड़े या बारिश सामान्य से कम ही हो, यह जरूरी नहीं है।
दाल और अनाज पर भी नजर
बारिश में कमी का असर दालों और अनाज के उत्पादन पर पड़ने की स्थिति में इनकी कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। सरकार जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक जारी करने, आयात या अन्य आपूर्ति संबंधी कदमों के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती है।
खाद्य महंगाई का सीधा असर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के खर्च में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण कीमतों में तेज बढ़ोतरी ज्यादा महसूस होती है।
फिलहाल खाद्य कीमतों में बड़ी तेजी को निश्चित मानना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति मॉनसून की आगे की चाल, फसलों की बुवाई, उत्पादन, सरकारी स्टॉक और बाजार में आपूर्ति पर निर्भर करेगी। इसलिए कमजोर मानसून और अल नीनो को महंगाई के संभावित जोखिम के रूप में देखना अधिक उचित है।