मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली। वैश्विक इक्विटी बाजारों में सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से घरेलू बाजार को समर्थन मिला। इसके अलावा विदेशी फंडों की ओर से भारतीय शेयरों में निवेश ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 285 अंक की बढ़त के साथ 77,944.02 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 285 अंक यानी करीब 0.37 प्रतिशत चढ़कर 77,944.02 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 23.25 अंक यानी करीब 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,356.10 अंक पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, हालांकि बाजार में आगे उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना भी बनी हुई है।

बाजार में तेजी के प्रमुख कारणों में वैश्विक इक्विटी बाजारों का सकारात्मक रुख शामिल रहा। दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में निवेशकों की धारणा बेहतर रहने से भारतीय बाजार को भी शुरुआती समर्थन मिला। वैश्विक बाजारों का रुख भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक जोखिम धारणा घरेलू बाजार में पूंजी के प्रवाह को प्रभावित करती हैं।

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने भारतीय बाजार की धारणा को मजबूती दी। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने से देश के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है। इससे रुपये, मुद्रास्फीति और चालू खाते के संतुलन पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है।

तेल की कीमतों में गिरावट का असर उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है जिनके लिए ईंधन और ऊर्जा लागत कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। परिवहन, विमानन, पेंट, रसायन और कई अन्य क्षेत्रों की कंपनियों के लिए कम कच्चा तेल लागत के लिहाज से सकारात्मक हो सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेज गिरावट को घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।

बाजार की तेजी को विदेशी फंडों के निवेश से भी सहारा मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से भारतीय इक्विटी बाजार में पूंजी आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। विदेशी निवेश में बदलाव का असर शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों के साथ-साथ रुपये और बड़े शेयरों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

हालांकि, विदेशी निवेश का रुख लगातार एक जैसा नहीं रहता। वैश्विक ब्याज दरों, अमेरिकी बाजारों के प्रदर्शन, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक घटनाक्रम जैसे कई कारक विदेशी निवेशकों के फैसले को प्रभावित करते हैं। इसलिए शुरुआती तेजी के बावजूद निवेशक बाजार की आगे की दिशा को लेकर सतर्क रह सकते हैं।

सेंसेक्स में शामिल प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान खरीदारी का रुझान देखने को मिला। बाजार में व्यापक धारणा सकारात्मक रहने से कई क्षेत्रों के शेयरों में मांग बनी रही। वहीं, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन पर भी रहेगी।

निफ्टी में सेंसेक्स की तुलना में तेजी सीमित रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23.25 अंक बढ़कर 24,356.10 पर पहुंचा। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में खरीदारी तो रही, लेकिन निवेशकों ने बहुत आक्रामक दांव लगाने के बजाय सावधानी के साथ कारोबार करना पसंद किया।

बाजार विशेषज्ञों के लिए कच्चे तेल की कीमतें इस समय एक महत्वपूर्ण संकेतक बनी हुई हैं। भारत के लिए तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आर्थिक दृष्टि से राहत दे सकती है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में किसी बड़े बदलाव की स्थिति में कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है। ऐसे में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बनी रहेगी।

भारतीय शेयर बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच वैश्विक संकेतों की भूमिका भी बढ़ गई है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में होने वाली गतिविधियों का असर भारतीय बाजार की शुरुआती दिशा पर पड़ता है। बुधवार को वैश्विक इक्विटी बाजारों के सकारात्मक रुख ने घरेलू निवेशकों को भी खरीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

इसके साथ ही विदेशी फंडों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी। यदि विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो इससे घरेलू शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर भी नजर रखनी होगी।

घरेलू स्तर पर भी कंपनियों के तिमाही नतीजे, आर्थिक वृद्धि के आंकड़े, महंगाई और सरकार की नीतियां बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। इन संकेतकों के आधार पर निवेशकों की धारणा में तेजी या कमजोरी आ सकती है।

बाजार में तेजी के बावजूद विशेषज्ञ आमतौर पर निवेशकों को केवल एक दिन के कारोबार के आधार पर निर्णय लेने से बचने की सलाह देते हैं। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में दैनिक उतार-चढ़ाव कई वैश्विक और घरेलू कारकों से प्रभावित होते हैं। इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है।

बुधवार की शुरुआत हालांकि भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रही। सेंसेक्स 285 अंक की बढ़त के साथ 77,944.02 और निफ्टी 23.25 अंक की तेजी के साथ 24,356.10 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक बाजारों की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी फंडों के निवेश ने बाजार को शुरुआती सहारा दिया।

अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कारोबार बढ़ने के साथ यह शुरुआती तेजी कायम रहती है या बाजार में मुनाफावसूली का दबाव आता है। वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेंगी।

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