मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 17 अगस्त 2026 को लगातार दबाव देखने को मिला। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। BSE सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत गिरकर 77,728.16 पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 50 में 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 24,287.65 पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने एक बार फिर 78,000 का महत्वपूर्ण स्तर गंवा दिया, जबकि निफ्टी 24,300 के नीचे फिसल गया।
बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहों में पश्चिम एशिया का तनाव, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और आईटी शेयरों में बिकवाली शामिल रही। निफ्टी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।
IT शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव
सोमवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत टूटकर सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा। Infosys, Sun Pharma और HCL Technologies निफ्टी 50 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।
आईटी और FMCG शेयरों की कमजोरी ने बेंचमार्क इंडेक्स को नीचे खींचा। दूसरी तरफ मेटल और रियल्टी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की।
कच्चे तेल की तेजी बनी चिंता
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमत एक बड़ी चिंता बनी हुई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि कच्चे तेल में तेजी का भारतीय इक्विटी बाजार पर नकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी असर
बाजार की कमजोरी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी एक कारण रही। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा।
तिमाही नतीजों का सीजन खत्म होने के बाद घरेलू बाजार में फिलहाल बड़े नए ट्रिगर भी सीमित हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर ज्यादा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में दिखी मजबूती
बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में करीब 0.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में करीब 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
इसका मतलब है कि बिकवाली मुख्य रूप से कुछ बड़ी कंपनियों और चुनिंदा सेक्टरों में केंद्रित रही। छोटे और मझोले शेयरों में निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
पिछले सत्र में भी गिरा था बाजार
इससे पहले शुक्रवार, 14 अगस्त को भी भारतीय बाजार कमजोर बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 70.71 अंक गिरकर 78,009.25 और निफ्टी 29.85 अंक टूटकर 24,366 पर बंद हुआ था।
सोमवार की गिरावट के बाद सेंसेक्स 78 हजार के नीचे पहुंच गया। निफ्टी के लिए भी 24,300 का स्तर बरकरार नहीं रह सका।
आगे किन चीजों पर रहेगी नजर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहने वाली है। अगर तेल की कीमतों में और तेजी आती है तो घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक बाजारों की चाल भी महत्वपूर्ण रहेगी।
तकनीकी स्तर पर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए केवल छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय बाजार के लिए कमजोर रहा। सेंसेक्स 77,728 और निफ्टी 24,288 के करीब बंद हुआ, जबकि आईटी शेयरों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।