नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट करने वाले ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन डेटा के इस्तेमाल से कर्ज उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत ग्राहकों के UPI भुगतान और दूसरे डिजिटल लेनदेन के पैटर्न का इस्तेमाल उनकी ऋण पात्रता का आकलन करने में किया जा सकता है। इससे खासतौर पर ऐसे लोगों के लिए औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से लोन हासिल करना आसान हो सकता है, जिनकी पारंपरिक क्रेडिट हिस्ट्री सीमित है।
बैंकिंग व्यवस्था में आमतौर पर किसी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसकी आय, मौजूदा कर्ज, बैंक स्टेटमेंट, क्रेडिट स्कोर और भुगतान इतिहास जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे छोटे कारोबारी, दुकानदार, स्वरोजगार करने वाले और नए ग्राहक हैं, जिनके पास मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती। दूसरी तरफ ये लोग रोजाना बड़ी संख्या में UPI के जरिए पैसे प्राप्त और खर्च कर रहे हैं।
ऐसे में डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड बैंक को ग्राहक की वित्तीय गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है। नियमित रूप से होने वाले डिजिटल भुगतान, खाते में आने वाली रकम और लेनदेन के व्यवहार जैसे संकेत क्रेडिट मूल्यांकन में उपयोगी हो सकते हैं।
UPI डेटा कैसे बन सकता है मददगार?
भारत में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। किराना दुकान से लेकर सब्जी विक्रेता और बड़े प्रतिष्ठानों तक QR कोड के जरिए भुगतान सामान्य हो चुका है। छोटे व्यापारियों के लिए भी डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा के कारोबार का हिस्सा है।
ऐसे व्यापारियों के बैंक खाते में लगातार डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज होते हैं। इससे उनके कारोबार के नकदी प्रवाह का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है। यदि बैंक इस डेटा का नियमानुसार क्रेडिट असेसमेंट में इस्तेमाल करता है तो उन ग्राहकों की भुगतान क्षमता का अनुमान लगाने में अतिरिक्त मदद मिल सकती है।
उदाहरण के तौर पर किसी छोटे दुकानदार के पास औपचारिक वेतन पर्ची नहीं हो सकती, लेकिन उसके खाते में प्रतिदिन UPI के जरिए नियमित भुगतान आ रहे हों। यह ट्रांजैक्शन हिस्ट्री उसकी कारोबारी गतिविधियों का संकेत दे सकती है।
छोटे कारोबारियों को मिल सकता है फायदा
डिजिटल ट्रांजैक्शन आधारित लेंडिंग का सबसे बड़ा संभावित फायदा छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को हो सकता है। कई छोटे व्यापारियों को बैंक लोन लेने में दस्तावेज और पर्याप्त क्रेडिट हिस्ट्री की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
यदि उनके डिजिटल कारोबार के रिकॉर्ड को भी क्रेडिट मूल्यांकन में शामिल किया जाता है तो बैंक के पास उनकी आर्थिक गतिविधि समझने के लिए अतिरिक्त डेटा उपलब्ध होगा। इससे पात्र ग्राहकों के लिए छोटे कारोबारी कर्ज या अन्य क्रेडिट उत्पादों तक पहुंच आसान हो सकती है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल UPI इस्तेमाल करने से हर ग्राहक को लोन मिल जाएगा। अंतिम मंजूरी बैंक की पात्रता शर्तों, जोखिम मूल्यांकन, ग्राहक की वित्तीय स्थिति और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी।
क्रेडिट स्कोर का विकल्प नहीं
UPI ट्रांजैक्शन आधारित मूल्यांकन को पारंपरिक क्रेडिट स्कोर का सीधा विकल्प समझना सही नहीं होगा। बैंक किसी ग्राहक की ऋण पात्रता तय करते समय कई कारकों पर विचार करते हैं। डिजिटल लेनदेन इनमें एक अतिरिक्त संकेतक की भूमिका निभा सकता है।
किसी व्यक्ति के खाते में कितना पैसा आता है, कितनी नियमितता से लेनदेन होते हैं और उसकी वित्तीय देनदारियां क्या हैं, जैसे पहलुओं को अन्य वित्तीय जानकारी के साथ देखा जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को औपचारिक ऋण व्यवस्था के दायरे में लाने में मदद करना हो सकता है, जिनके पास पारंपरिक क्रेडिट रिकॉर्ड कम है लेकिन डिजिटल वित्तीय गतिविधि का पर्याप्त इतिहास मौजूद है।
डिजिटल फुटप्रिंट की बढ़ रही अहमियत
भारत में डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ ग्राहकों का वित्तीय डिजिटल फुटप्रिंट लगातार बढ़ रहा है। UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड भुगतान के जरिए होने वाले लेनदेन से वित्तीय गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार होता है।
बैंक और वित्तीय संस्थान तकनीक की मदद से इस डेटा का विश्लेषण करके जोखिम का आकलन अधिक तेजी से कर सकते हैं। इससे लोन आवेदन की प्रक्रिया को तेज करने और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को कम करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
डिजिटल लेंडिंग में डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इनके जरिए बड़ी मात्रा में वित्तीय डेटा का विश्लेषण कम समय में किया जा सकता है।
SBI के लिए बड़ा डिजिटल बाजार
SBI के पास देशभर में ग्राहकों का विशाल आधार है। बैंक की शाखाओं के साथ मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में डिजिटल डेटा आधारित क्रेडिट मॉडल बैंक को बड़ी संख्या में नए ग्राहकों तक ऋण सेवाएं पहुंचाने का अवसर दे सकता है।
खास तौर पर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान का विस्तार बैंकिंग व्यवस्था के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। ऐसे क्षेत्रों में छोटे दुकानदार और कारोबारी UPI भुगतान स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उनमें से कई औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से पूरी तरह जुड़े नहीं हैं।
डिजिटल लेनदेन के आधार पर बेहतर क्रेडिट असेसमेंट ऐसे ग्राहकों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद कर सकता है।
ग्राहकों की सहमति और डेटा सुरक्षा भी अहम
डिजिटल डेटा आधारित लेंडिंग के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा और ग्राहक की सहमति का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी भी वित्तीय डेटा का इस्तेमाल लागू बैंकिंग और डेटा सुरक्षा नियमों के अनुरूप होना जरूरी है।
ग्राहकों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जा रहा है और उसका उद्देश्य क्या है। पारदर्शिता और सुरक्षा डिजिटल लेंडिंग व्यवस्था पर ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल लेंडिंग से संबंधित नियमों और उपभोक्ता संरक्षण पर लगातार जोर देता रहा है। बैंक और वित्तीय संस्थानों को इन नियमों के अनुरूप ही डिजिटल ऋण उत्पाद संचालित करने होते हैं।
लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
डिजिटल तरीके से आसानी से उपलब्ध होने वाला लोन सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन ग्राहकों को कर्ज लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, पुनर्भुगतान अवधि और अन्य शुल्कों को ध्यान से समझना चाहिए। केवल तुरंत लोन उपलब्ध होने के कारण आवश्यकता से अधिक कर्ज लेना वित्तीय परेशानी पैदा कर सकता है।
ग्राहकों को यह भी देखना चाहिए कि लोन का प्रस्ताव वास्तव में बैंक के आधिकारिक प्लेटफॉर्म से आया है या नहीं। डिजिटल लोन के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए संदिग्ध लिंक, अनजान ऐप और फर्जी कॉल से सावधान रहना जरूरी है।
बदल सकता है लोन देने का पारंपरिक तरीका
UPI और दूसरे डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल यदि बड़े स्तर पर क्रेडिट मूल्यांकन में होने लगता है तो भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में लोन देने का तरीका काफी बदल सकता है। भविष्य में केवल पारंपरिक आय प्रमाण और पुराने क्रेडिट रिकॉर्ड के बजाय वास्तविक डिजिटल कैश फ्लो भी ऋण पात्रता तय करने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसका फायदा विशेष रूप से उन छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार करने वालों तक पहुंच सकता है जो डिजिटल भुगतान तो बड़े पैमाने पर करते हैं, लेकिन औपचारिक क्रेडिट इतिहास की कमी के कारण बैंक लोन हासिल करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
SBI की इस दिशा में पहल डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि ग्राहक को कितना लोन मिलेगा, किस ब्याज दर पर मिलेगा और UPI डेटा को पात्रता में कितना महत्व दिया जाएगा, यह संबंधित उत्पाद की शर्तों और बैंक के क्रेडिट मूल्यांकन पर निर्भर करेगा। इसलिए किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले SBI की आधिकारिक शर्तों की जांच करना जरूरी है।