शेयर बाजार में भारी दबाव सेंसेक्स निफ्टी हफ्तेभर में करीब 2% टूटे
शेयर बाजार
बिजनेस डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह कमजोर साबित हुआ। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। दोनों प्रमुख सूचकांकों में इस सप्ताह 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई।
शुक्रवार को निफ्टी 50 करीब 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,781.76 पर बंद हुआ। पिछले पांच सप्ताह में दोनों बेंचमार्क इंडेक्स करीब 4.8 प्रतिशत टूट चुके हैं।
कच्चा तेल बना बाजार की सबसे बड़ी चिंता
इस सप्ताह भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का रहा। मध्य पूर्व में तनाव और प्रमुख समुद्री मार्गों पर हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह 8 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा और शुक्रवार को 104.61 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने करीब 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी छुआ।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है। यही चिंता शेयर बाजार के निवेशकों को परेशान कर रही है।
ग्लोबल ब्याज दरों ने भी बढ़ाई टेंशन
कच्चे तेल के अलावा वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार का मूड खराब किया। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट की चमक कम की।
अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान करीब तीन साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई। ऊंची ब्याज दरों की आशंका से विदेशी निवेशकों का रुख भी सतर्क बना हुआ है।
IT शेयरों पर सबसे ज्यादा मार
इस सप्ताह बिकवाली कई सेक्टरों में देखने को मिली। 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 ने साप्ताहिक नुकसान दर्ज किया। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 5.8 प्रतिशत टूट गया, जो अप्रैल के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही।
फाइनेंशियल शेयरों में भी करीब 1.9 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर सप्ताह के दौरान करीब 4.9 प्रतिशत गिरा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी दबाव देखने को मिला।
रुपये पर भी पड़ा असर
शेयर बाजार के साथ भारतीय रुपये के लिए भी सप्ताह मुश्किल रहा। रुपया सप्ताह के दौरान करीब 1 प्रतिशत कमजोर हुआ, जो मई के मध्य के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत वैश्विक बॉन्ड यील्ड भारतीय मुद्रा पर दबाव डाल रही हैं।
आगे बाजार की नजर इन संकेतों पर
आने वाले दिनों में निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक ब्याज दरों पर रहेगी। अगर तेल की कीमतों में नरमी आती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके उलट लंबे समय तक क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं बनी रह सकती हैं।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता अधिक है। ऐसे में निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।