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जुलाई में रोजगार के आंकड़ों ने दी राहत

Ratna Netam
17 Aug 2026 8:03 PM IST
जुलाई में रोजगार के आंकड़ों ने दी राहत
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नई दिल्ली। रोजगार के मोर्चे पर भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जुलाई 2026 में देश की बेरोजगारी दर घटकर **5.1 प्रतिशत** रह गई, जो जून में 5.6 प्रतिशत थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानी **PLFS** के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में कमी दर्ज की गई। जुलाई में ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकर 4.4 प्रतिशत और शहरी बेरोजगारी दर 7.2 प्रतिशत रही। ये आंकड़े श्रम बाजार में महीने-दर-महीने सुधार का संकेत देते हैं।
जुलाई के आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बेरोजगारी में गिरावट के साथ श्रम बल भागीदारी दर और कामकाजी आबादी के अनुपात में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि केवल एक महीने के आंकड़े के आधार पर रोजगार बाजार में लंबे समय के बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
5.6% से घटकर 5.1% हुई बेरोजगारी
PLFS के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर जून के **5.6 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 5.1 प्रतिशत** हो गई। मई 2026 में यह दर 5.6 प्रतिशत और अप्रैल में 5.1 प्रतिशत थी। यानी जुलाई में बेरोजगारी एक बार फिर अप्रैल के स्तर पर आ गई।
बेरोजगारी दर उन लोगों का अनुपात बताती है जो श्रम बल का हिस्सा हैं, काम करने के इच्छुक और उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा सुधार
जुलाई के आंकड़ों में ग्रामीण भारत का प्रदर्शन खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जून के करीब **4.9 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत** हो गई। कृषि और उससे जुड़े कामों में मौसमी गतिविधियां बढ़ने को ग्रामीण रोजगार में सुधार के संभावित कारणों में देखा जा रहा है।
मानसून के दौरान कृषि गतिविधियां तेज होने से ग्रामीण इलाकों में श्रमिकों की मांग बढ़ सकती है। बुवाई और खेती से जुड़े अन्य कामों का रोजगार पर असर पड़ता है।
शहरों में भी बेरोजगारी घटी
शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अब भी ज्यादा बनी हुई है, लेकिन जुलाई में यहां भी सुधार दर्ज किया गया। शहरी बेरोजगारी दर जून के **7.8 प्रतिशत से घटकर 7.2 प्रतिशत** पर आ गई।
शहरी रोजगार की स्थिति पर मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, आईटी, परिवहन और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का बड़ा असर पड़ता है। ऐसे में शहरी बेरोजगारी में गिरावट को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, हालांकि 7 प्रतिशत से ऊपर की दर यह भी बताती है कि शहरों में रोजगार की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
युवाओं के लिए तस्वीर कैसी?
भारत में रोजगार की चर्चा में युवा बेरोजगारी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। PLFS के जुलाई आंकड़ों के मुताबिक 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर **14.9 प्रतिशत** रही, जो जून के 15.3 प्रतिशत के मुकाबले कम है।
युवा बेरोजगारी का स्तर कुल बेरोजगारी दर से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि श्रम बाजार के समग्र आंकड़ों में सुधार के बावजूद पहली नौकरी तलाश रहे युवाओं और नए कामगारों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन में भी सुधार
बेरोजगारी दर के साथ **Labour Force Participation Rate यानी LFPR** भी रोजगार बाजार को समझने का अहम पैमाना है। यह बताता है कि काम करने योग्य आबादी में कितने लोग नौकरी कर रहे हैं या सक्रिय रूप से नौकरी तलाश रहे हैं।
जुलाई 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल LFPR बढ़कर **56.5 प्रतिशत** हो गई, जो जून में 55.4 प्रतिशत थी। वहीं Worker Population Ratio यानी WPR भी बढ़कर **53.6 प्रतिशत** पहुंच गया।
LFPR और WPR में बढ़ोतरी के साथ बेरोजगारी दर में गिरावट होना श्रम बाजार के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक संयोजन माना जा सकता है।
महिलाओं की भागीदारी भी अहम
भारत के रोजगार बाजार की एक बड़ी चुनौती महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी रही है। जुलाई के आंकड़ों में महिला LFPR में भी सुधार दर्ज किया गया। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने से कुल श्रम बल भागीदारी दर को समर्थन मिला।
महिलाओं के लिए नियमित और बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ना आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या रोजगार संकट खत्म हो गया?
जुलाई के आंकड़े सकारात्मक जरूर हैं, लेकिन इन्हें रोजगार की सभी समस्याओं के समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बेरोजगारी दर केवल यह बताती है कि सक्रिय श्रम बल में कितने लोगों को काम नहीं मिल रहा। यह नौकरी की गुणवत्ता, वेतन, रोजगार की स्थिरता या कामगार की योग्यता के अनुरूप नौकरी मिलने जैसी चीजों की पूरी तस्वीर नहीं देती।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के आंकड़ों पर कृषि की मौसमी गतिविधियों का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों के आंकड़े यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि जुलाई में दिखाई दिया सुधार कितना टिकाऊ है।
फिलहाल बेरोजगारी दर का **5.1 प्रतिशत** पर आना, LFPR में बढ़ोतरी और ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में सुधार रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन युवा बेरोजगारी और शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ऊंची बेरोजगारी दर बताती है कि रोजगार सृजन की चुनौती अभी भी बड़ी है।
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