मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया।

शुरुआती कारोबार में प्रमुख इक्विटी इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में कमजोरी आई।

सेंसेक्स 226 अंक गिरा

सोमवार को शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 226.60 अंक की गिरावट के साथ 77,028.56 के स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में दबाव में रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर कारोबारी रुख कमजोर बना रहा।

पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी चिंता

मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में नए तनाव की खबरों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि विदेशी फंडों की लगातार निकासी भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रही है।

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जब भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो इसका असर शेयर कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

इसके अलावा अमेरिका समेत अन्य प्रमुख बाजारों में कमजोर रुझानों का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा है।

ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत

घरेलू बाजार की शुरुआत कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों की नजर महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं।

इसका असर शेयर बाजारों पर देखने को मिलता है।

निवेशकों की नजर अब आगे की गतिविधियों पर

बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, खासकर अगर पश्चिम एशिया की स्थिति और बिगड़ती है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है।

किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कई सेक्टरों पर पड़ सकता है। पेट्रोलियम, एविएशन, पेंट, केमिकल और परिवहन से जुड़े क्षेत्रों पर लागत बढ़ने का दबाव आ सकता है।

वहीं, तेल कंपनियों और कुछ ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

बाजार में सतर्कता का माहौल

सोमवार की शुरुआती गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक घटनाओं से कितना प्रभावित होता है। पश्चिम एशिया तनाव, तेल कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई है, लेकिन दिन के दौरान बाजार की चाल वैश्विक संकेतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

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