नई दिल्ली : चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और बाजार में सप्लाई को लेकर चल रही चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी बिक्री व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब चीनी मिलों के लिए नया नियम लागू कर दिया है।

नए नियम के तहत चीनी का मासिक कोटा अब 15-15 दिनों के पखवाड़े में बांट दिया गया है। सरकार ने 1 सितंबर 2026 से 15 सितंबर 2026 तक के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा निर्धारित किया है।

सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

चीनी बिक्री के लिए बदला कोटा सिस्टम

सरकार की ओर से जारी नई व्यवस्था के अनुसार, अब चीनी मिलों को तय समय के भीतर अपने स्टॉक की बिक्री करनी होगी।

पहले चीनी मिलों को महीने भर के हिसाब से बिक्री कोटा दिया जाता था, लेकिन अब इसे 15-15 दिनों के पखवाड़े में बांट दिया गया है।

इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता लगातार बनी रहने की उम्मीद है। सरकार को आशंका थी कि लंबे समय के कोटे के कारण कुछ जगहों पर स्टॉक रोकने या सप्लाई प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

रिलीज ऑर्डर के बाद 7 दिन में बिक्री जरूरी

सरकार ने रिलीज ऑर्डर मिलने के बाद चीनी बिक्री की समय सीमा में भी बड़ा बदलाव किया है।

अब चीनी मिलों को रिलीज ऑर्डर जारी होने के 7 दिनों के भीतर अपना स्टॉक बाजार में बेचना अनिवार्य होगा।

इससे पहले चीनी मिलों को स्टॉक बेचने के लिए करीब एक महीने का समय दिया जाता था। सरकार ने इस अवधि को घटाकर सिर्फ एक सप्ताह कर दिया है।

जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने की कोशिश

सरकार ने यह कदम चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी की आशंकाओं को रोकने के लिए उठाया है।

हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही बाजार में सप्लाई कम होने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं।

सरकार चाहती है कि चीनी का स्टॉक बाजार में लगातार उपलब्ध रहे, जिससे कीमतों पर नियंत्रण बना रहे और आम उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

त्योहारों से पहले उठाया गया कदम

आने वाले महीनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।

त्योहारों के समय मिठाई, घरेलू उपयोग और खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार ने पहले से ही बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की तैयारी शुरू कर दी है।

सरकार का मानना है कि नए नियमों से त्योहारों के दौरान चीनी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी।

बाजार में कीमतों पर असर की उम्मीद

चीनी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से बाजार में सप्लाई व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

अगर चीनी मिलें समय पर स्टॉक बाजार में उपलब्ध कराती हैं तो कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।

हालांकि, कीमतों पर असर कई अन्य कारणों पर भी निर्भर करेगा, जिनमें उत्पादन, मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति शामिल है।

चीनी मिलों को करना होगा नियमों का पालन

नए नियमों के बाद चीनी मिलों को अपनी बिक्री योजना में बदलाव करना होगा। उन्हें सरकार की ओर से तय कोटे और समय सीमा के अनुसार ही बाजार में चीनी उपलब्ध करानी होगी।

अगर कोई मिल तय समय में स्टॉक नहीं बेचती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार लगातार चीनी बाजार की स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।

उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश

चीनी रोजमर्रा की जरूरतों वाली महत्वपूर्ण वस्तुओं में शामिल है। इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ता है।

सरकार का नया फैसला उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में संतुलन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

फिलहाल 1 सितंबर से लागू होने वाले नए कोटा सिस्टम के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर इसका असर देखने को मिलेगा। सरकार की नजर अब सप्लाई व्यवस्था और कीमतों के उतार-चढ़ाव पर बनी रहेगी।

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