बाजार में गिरावट, लेकिन सुजलॉन की चमक बरकरार

Update: 2026-07-15 10:17 GMT

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में एक समय ऐसा था जब सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) का नाम भारी कर्ज, वित्तीय संकट और शेयरों में रिकॉर्ड गिरावट के लिए लिया जाता था। कई खुदरा और बड़े निवेशकों को लगने लगा था कि विंड एनर्जी (पवन ऊर्जा) क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी का भविष्य अब पूरी तरह अंधकार में है। लेकिन पिछले कुछ समय में सुजलॉन ने जो टर्नअराउंड (वापसी) दिखाया है, उसने बाजार के विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। आज कंपनी की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही चौतरफा बिकवाली के बावजूद, सुजलॉन एनर्जी के प्रति उनका आकर्षण कम नहीं हुआ है। विदेशी निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंडों (Mutual Funds) ने लगातार दूसरी तिमाही में सुजलॉन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो कंपनी के प्रति बड़े संस्थागत निवेशकों के बढ़ते अटूट भरोसे को दर्शाता है।

इस बड़े निवेशक भरोसे के पीछे केवल कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इसकी भविष्य की मजबूत व्यावसायिक योजनाएं हैं। सुजलॉन एनर्जी को हाल ही में अपने सबसे महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस नए S175 विंड टर्बाइन जनरेटर (S175 Wind Turbine) के लिए पहला बड़ा व्यावसायिक ऑर्डर प्राप्त हो गया है। यह नया ऑर्डर मिलना कंपनी की तकनीकी श्रेष्ठता और बाजार में उसकी पकड़ को साबित करता है। S175 सीरीज को कम हवा वाले क्षेत्रों में भी अधिकतम बिजली उत्पादन करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिसकी भारतीय बाजार में भारी मांग देखी जा रही है। इस सफल शुरुआत से कंपनी के पास आगामी वर्षों के लिए एक रिकॉर्ड-ब्रेकिंग ऑर्डर बुक (Order Book) तैयार हो गई है, जो आने वाले समय में कंपनी के राजस्व (Revenue) में बंपर बढ़ोतरी का साफ संकेत दे रही है।

सुजलॉन एनर्जी की इस ऐतिहासिक वापसी का सबसे बड़ा और मुख्य कारण कंपनी का पूरी तरह से कर्ज-मुक्त (Debt-Free) होना है। कुछ साल पहले तक जो कंपनी हजारों करोड़ रुपये के कर्ज के जाल में फंसी हुई थी, उसने रणनीतिक रूप से राइट्स इश्यू, एसेट मोनेटाइजेशन और आंतरिक फंड जनरेशन के जरिए अपने पूरे कर्ज का भुगतान कर दिया है। आज सुजलॉन एक नेट-डेट फ्री कंपनी बन चुकी है। कर्ज का बोझ हटने से कंपनी का जो पैसा पहले भारी-भरकम ब्याज चुकाने में बर्बाद होता था, वह अब सीधे कंपनी के शुद्ध मुनाफे (Net Profit) में जुड़ रहा है। इसी वित्तीय मजबूती को भांपते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) और बड़े म्यूचुअल फंड हाउसों ने शेयरहोल्डिंग (Shareholding Pattern) में आक्रामक तरीके से खरीदारी की है।

रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) के क्षेत्र में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं और ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ते झुकाव ने भी सुजलॉन के लिए उत्प्रेरक का काम किया है। विश्लेषकों का मानना है कि कर्ज-मुक्त बैलेंस शीट, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और S175 जैसे कुशल विंड टर्बाइन के सफल लॉन्च के इस त्रिकोणीय संयोजन ने सुजलॉन को भारतीय ऊर्जा बाजार में एक बार फिर सबसे मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है। बड़े निवेशक अब इसे एक जोखिम भरे पेनी स्टॉक के रूप में नहीं, बल्कि भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की एक लीडर ग्रोथ कंपनी के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि बाजार की हर गिरावट में बड़े फंड्स सुजलॉन के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में लगातार शामिल कर रहे हैं।

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