नई दिल्ली: देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस अपने कार्यबल में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों के करीब एक-तिहाई हिस्से को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी भूमिकाओं में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। यह कदम तेजी से बदलती तकनीकी जरूरतों और एआई आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया जा रहा है।

आईटी सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों से ऑटोमेशन, जनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। कंपनियां अब पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं के साथ-साथ एआई आधारित समाधान, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इसी बदलाव के बीच इंफोसिस अपने कर्मचारियों के कौशल को नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप ढालने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी की योजना के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एआई से जुड़ी परियोजनाओं, ऑटोमेशन, डेटा प्रोसेसिंग और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। इसका मकसद कर्मचारियों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना और कंपनी की एआई क्षमताओं को मजबूत करना है।
इंफोसिस जैसे बड़े आईटी संस्थानों के लिए यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि वैश्विक स्तर पर कंपनियां अब एआई आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। बैंकिंग, रिटेल, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आईटी कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत है जो पारंपरिक कोडिंग के साथ-साथ एआई टूल, मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन को भी समझते हों।
कर्मचारियों को एआई भूमिकाओं में स्थानांतरित करने का मतलब केवल विभाग बदलना नहीं होगा। इसके लिए बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और अपस्किलिंग की भी जरूरत पड़ेगी। कई कर्मचारियों को नई तकनीक, एआई मॉडल, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और ऑटोमेशन से जुड़ी स्किल सीखनी होंगी।
आईटी सेक्टर में यह बदलाव रोजगार के स्वरूप को भी प्रभावित कर सकता है। जहां कुछ पारंपरिक भूमिकाओं में काम कम हो सकता है, वहीं एआई, डेटा और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़ी नई नौकरियों की मांग बढ़ सकती है। इस कारण कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की बजाय उन्हें नई भूमिकाओं के लिए तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही हैं।
इंफोसिस की यह योजना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में टेक कंपनियों में एआई आधारित भूमिकाओं का हिस्सा और बढ़ सकता है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग, कस्टमर सपोर्ट और बिजनेस प्रोसेस जैसे कई कामों में एआई का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। अब कंपनियां इसे अपने मुख्य कारोबार का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही हैं। कंपनी के लिए यह रणनीति प्रतिस्पर्धा के लिहाज से भी अहम है। वैश्विक आईटी बाजार में कई बड़ी कंपनियां एआई सेवाओं और जनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म पर भारी निवेश कर रही हैं। ग्राहकों की मांग भी तेजी से बदल रही है और वे ऐसी तकनीकी सेवाएं चाहते हैं जिनसे लागत कम हो और काम की गति बढ़े।
एआई आधारित सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ कर्मचारियों के लिए भी नई संभावनाएं बन सकती हैं। ऐसे कर्मचारी जिनके पास डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, क्लाउड और एआई टूल की जानकारी होगी, उनकी मांग आने वाले वर्षों में बढ़ सकती है। वहीं पारंपरिक तकनीकी भूमिकाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नई स्किल सीखना जरूरी होता जा सकता है।
इंफोसिस का एक-तिहाई कार्यबल एआई भूमिकाओं में स्थानांतरित करने का लक्ष्य आईटी सेक्टर में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इससे साफ है कि कंपनी भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए अभी से अपनी टीम को तैयार करना चाहती है। हालांकि इस प्रक्रिया में कर्मचारियों के सामने चुनौतियां भी होंगी। नई तकनीक सीखने, बदलते काम के तरीके को अपनाने और नई जिम्मेदारियों के मुताबिक खुद को तैयार करने में समय लग सकता है। कंपनी को भी प्रशिक्षण, संसाधन और नए प्रोजेक्ट उपलब्ध कराने होंगे।
टेक इंडस्ट्री में एआई का प्रभाव अब केवल नए प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रहा है। यह कर्मचारियों की भूमिकाओं और कंपनियों की भर्ती रणनीति को भी बदल रहा है। आने वाले समय में आईटी नौकरियों में एआई स्किल एक महत्वपूर्ण योग्यता बन सकती है।
इंफोसिस की इस योजना पर टेक इंडस्ट्री की नजर बनी हुई है। यदि कंपनी अपने कार्यबल के बड़े हिस्से को सफलतापूर्वक एआई भूमिकाओं में स्थानांतरित करती है, तो इसका असर दूसरे आईटी संस्थानों की रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है। इससे भारतीय आईटी सेक्टर में अपस्किलिंग और एआई आधारित नौकरियों की रफ्तार और तेज होने की संभावना है।
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