मुंबई: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पाया है कि विनोद अडानी और 11 अन्य लोगों के खिलाफ मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी वाले व्यापारिक तरीकों के आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसके साथ ही, पांच साल से अधिक समय से चल रही जांच का मामला खत्म हो गया है।
SEBI के होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा पारित आदेश में इस मामले में जारी 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) का निपटारा कर दिया गया।
इस मामले की जांच अक्टूबर 2020 में शुरू हुई थी, जब SEBI को उसी साल जून और जुलाई में शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों में अडानी ग्रुप की चार लिस्टेड कंपनियों - अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड SEZ और अडानी ट्रांसमिशन (जिसे अब अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के नाम से जाना जाता है) - द्वारा MPS नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद SEBI ने सितंबर 2024 में एक 'शो-कॉज नोटिस' जारी किया और फिर मार्च 2025 में एक सप्लीमेंट्री नोटिस जारी किया।
इस मामले का मुख्य आरोप यह था कि गौतम अडानी और राजेश अडानी के भाई विनोद अडानी, प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा थे और इन चार कंपनियों में दो फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के जरिए किए गए निवेश पर उनका कंट्रोल था।
ये आरोप इस नियम से जुड़े थे कि लिस्टेड कंपनियों को कम से कम 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखनी होती है।
हालांकि, मामले की जांच करने के बाद SEBI को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि विनोद अडानी का असल निवेशकों या FPIs पर कोई कंट्रोल था।
आदेश में कहा गया, "चूंकि FPIs और ओपल (Opal) पर प्रभावी कंट्रोल का मुख्य आरोप साबित नहीं हुआ है, इसलिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़ा आरोप भी नहीं टिक पाया।"
चूंकि MPS का आरोप साबित नहीं हुआ, इसलिए 'प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज' (PFUTP) रेगुलेशंस के तहत लगाया गया संबंधित आरोप भी खारिज हो गया।
अलग से, अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों और उनके व्यक्तिगत डायरेक्टर्स व अधिकारियों ने इस कार्यवाही को सेटल (निपटारा) करने का विकल्प चुना था। SEBI ने एक अलग आदेश में सेटलमेंट को मंज़ूरी दी, जिसके तहत संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों ने मिलकर 26 अगस्त को 1.48 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
SEBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत सेटलमेंट से बिना किसी ज़िम्मेदारी को स्वीकार किए ही कार्यवाही का निपटारा हो जाता है और यह एडजुडिकेशन (न्यायिक प्रक्रिया) का एक विकल्प है।
हालांकि, इस कार्यवाही में शामिल विनोद अडानी और अन्य नोटिस पाने वालों ने एडजुडिकेशन का रास्ता चुना। रेगुलेटर ने पाया कि शुरुआती आरोप साबित नहीं हुए, इसलिए अब उनके ख़िलाफ़ MPS और PFUTP से जुड़े आरोपों का निपटारा कर दिया गया है।