नई दिल्ली: सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले 16 लाख से ज़्यादा छोटे व्यवसायों को जल्द ही साल में सिर्फ़ एक GST रिटर्न भरने की इजाज़त मिल सकती है। GST काउंसिल ने गुरुवार को 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक आसान कंप्लायंस स्कीम को सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, रिटेल दुकानों, सैलून और छोटे भोजनालयों जैसे योग्य व्यवसाय हर तिमाही GST का भुगतान करेंगे, लेकिन साल में सिर्फ़ एक रिटर्न भरेंगे। इससे उस सेक्टर के लिए कंप्लायंस की ज़रूरतें कम हो जाएंगी, जिसकी कुल GST देनदारी में हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में मंज़ूर किए गए इस प्रस्ताव को 5 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, योग्य व्यवसाय हर तिमाही टैक्स का भुगतान करते हुए साल में एक ही GST रिटर्न भरेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि स्कीम को लागू करने के लिए ज़रूरी विस्तृत ऑपरेशनल ढांचा और कानूनी बदलाव काउंसिल की अगली बैठक में पेश किए जाएंगे। इन सुधारों के 1 अप्रैल, 2027 से लागू होने की उम्मीद है।
इस प्रस्तावित स्कीम से बड़ी संख्या में ऐसे छोटे व्यवसायों को फ़ायदा होने की उम्मीद है जो सिर्फ़ रिटेल ग्राहकों के साथ काम करते हैं, जैसे कि आस-पड़ोस की दुकानें, सैलून, रेस्तरां और छोटे भोजनालय।
सरकारी अनुमानों के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव GST टैक्सपेयर्स में से लगभग 16.85 लाख सिर्फ़ ग्राहकों को सप्लाई की रिपोर्ट करते हैं। इनमें से लगभग 16.66 लाख टैक्सपेयर्स, यानी 99 प्रतिशत, का सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है।
बड़ी संख्या में होने के बावजूद, कुल GST टैक्स देनदारी में इन व्यवसायों की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है। चूंकि इनके ग्राहक आम लोग होते हैं जो इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं करते, इसलिए ऐसे विक्रेताओं द्वारा भरे गए रिटर्न का व्यापक GST क्रेडिट चेन पर सीमित असर पड़ता है। इसी वजह से ये आसान कंप्लायंस व्यवस्था के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।
अभी, GST टैक्सपेयर्स को आम तौर पर हर महीने रिटर्न भरना पड़ता है। 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों को 2021 से ही तिमाही रिटर्न भरने का विकल्प चुनने की इजाज़त दी गई है, हालांकि वे हर महीने टैक्स का भुगतान करते रहते हैं। नए प्रस्ताव का मकसद नियमों का पालन और आसान बनाना है; इसके तहत तिमाही टैक्स भुगतान जारी रखते हुए रिटर्न फाइलिंग को साल में एक बार करने का प्रावधान किया गया है।
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