Business। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को आईपीओ के दूसरे दिन भी शेयरों की खरीदारी के लिए निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिला। दोपहर 12:20 बजे तक करीब 30,213 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 3.75 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। कंपनी ने सार्वजनिक निवेशकों के लिए लगभग 19.75 करोड़ शेयर उपलब्ध कराए हैं, जबकि इनके मुकाबले करीब 73.97 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हो चुकी थीं। सबसे अधिक दिलचस्पी बड़े संस्थागत निवेशकों ने दिखाई है। वहीं, खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा भी पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया है।
दूसरे दिन भी निवेशकों में जबरदस्त उत्साह
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेशकों के लिए खुला था। पहले ही दिन इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली और कुछ ही समय में यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। दूसरे दिन भी इसकी मांग लगातार बढ़ती दिखाई दी।
गुरुवार सुबह 11 बजे तक आईपीओ को 3.48 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका था। इस दौरान निवेशकों ने लगभग 68.78 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाई थीं। इसके बाद दोपहर तक सब्सक्रिप्शन में और तेजी दर्ज की गई।
खास बात यह है कि इस सार्वजनिक निर्गम को संस्थागत निवेशकों के साथ खुदरा निवेशकों का भी समर्थन मिला है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आईपीओ के अंतिम दिन पर है, जब कुल मांग की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
संस्थागत निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी योग्य संस्थागत खरीदारों की ओर से सबसे अधिक मांग देखने को मिली।22 अक्टूबर की सुबह 11 बजे तक इस श्रेणी का हिस्सा 9.42 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। इस श्रेणी में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक और अन्य बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं।वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में भी अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सुबह 11 बजे तक यह हिस्सा 2.34 गुना सब्सक्राइब हो गया था।
बड़े निवेशकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संस्थागत निवेशक सामान्यतः किसी कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने के बाद निवेश का फैसला करते हैं। हालांकि, अधिक सब्सक्रिप्शन भविष्य में मुनाफे की गारंटी नहीं होता।
रिटेल निवेशकों का कोटा भी पूरी तरह भरा
इस आईपीओ में खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी भी लगातार बढ़ी है। पहले दिन रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं हुआ था, लेकिन दूसरे दिन यह आंकड़ा 100 प्रतिशत के पार पहुंच गया।
गुरुवार सुबह 11 बजे तक रिटेल निवेशकों के हिस्से को 1.03 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका था। इसका मतलब है कि खुदरा श्रेणी के लिए जितने शेयर आरक्षित किए गए थे, उनके मुकाबले अधिक शेयरों के लिए आवेदन आ गए थे।जियो के बड़े ग्राहक आधार और देशभर में इसकी पहचान को खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी का एक कारण माना जा रहा है।
कंपनी के दूरसंचार और डिजिटल कारोबार ने पिछले एक दशक में भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। ऐसे में आईपीओ के माध्यम से इसमें हिस्सेदारी लेने को लेकर निवेशकों में उत्साह दिखाई दे रहा है।
कितना है जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का प्राइस बैंड?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। निवेशकों को न्यूनतम 12 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा।
यदि कोई खुदरा निवेशक ऊपरी प्राइस बैंड यानी 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए आवेदन करता है, तो उसे 13,428 रुपये निवेश करने होंगे।यह आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। यानी निवेशकों के पास शुक्रवार तक आवेदन करने का अवसर रहेगा।
देश के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल जियो
जियो प्लेटफॉर्म्स का लगभग 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल है।यह रिलायंस समूह की ओर से करीब दो दशक बाद लाया गया बड़ा सार्वजनिक निर्गम भी है। इसे मुकेश अंबानी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत रिलायंस अपने पारंपरिक तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के साथ डिजिटल और तकनीकी सेवाओं का विस्तार कर रही है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के अंतर्गत दूरसंचार, ब्रॉडबैंड, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी समाधानों से जुड़े कारोबार आते हैं।कंपनी पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक यानी 5जी, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रही है।
कब हो सकता है शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग?
उपलब्ध आईपीओ कार्यक्रम के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों का आवंटन 26 अक्टूबर के आसपास अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।वहीं, कंपनी के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को होने की उम्मीद है।
जिन निवेशकों को शेयर आवंटित होंगे, वे लिस्टिंग के बाद उन्हें शेयर बाजार में खरीद या बेच सकेंगे। हालांकि, लिस्टिंग के दिन शेयर किस कीमत पर कारोबार शुरू करेंगे, यह बाजार की मांग और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।आईपीओ का कई गुना सब्सक्राइब होना शेयर के ऊंचे मूल्य पर सूचीबद्ध होने की गारंटी नहीं माना जा सकता।
निवेशकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर उत्साह के बीच निवेशकों को कुछ जोखिमों का आकलन भी करना चाहिए।किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, मुनाफा, कारोबार का भविष्य, प्रतिस्पर्धा और मूल्यांकन को समझना जरूरी होता है।
जियो को भारतीय दूरसंचार बाजार में मजबूत पहचान मिली है, लेकिन डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है।इसके अलावा शेयर बाजार की परिस्थितियां भी लिस्टिंग और उसके बाद के कारोबार को प्रभावित कर सकती हैं।
अब अंतिम दिन के सब्सक्रिप्शन पर नजर
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में दूसरे दिन तक सामने आए आंकड़ों ने निवेशकों के उत्साह को स्पष्ट कर दिया है। विशेष रूप से संस्थागत निवेशकों की ओर से भारी मांग देखने को मिली है।अब 23 अक्टूबर को आईपीओ के अंतिम दिन कुल सब्सक्रिप्शन कितना पहुंचता है, इस पर निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर रहेगी।
रिलायंस समूह के लिए यह आईपीओ डिजिटल कारोबार के विस्तार और पूंजी बाजार में नई संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रदर्शन शेयरों के आवंटन और लिस्टिंग के बाद ही सामने आएगा।