New Delhi नई दिल्ली : गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) व्यवस्था को लेकर देश के कारोबारियों में व्यापक स्तर पर सकारात्मक सोच देखने को मिली है। हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार 99 प्रतिशत से अधिक व्यवसायों ने GST प्रणाली को लेकर सकारात्मक या न्यूट्रल राय दी है। हालांकि इसके बावजूद कई कारोबारी अभी भी टैक्स की व्याख्या, अनुपालन की जटिलताओं और रिफंड प्रक्रिया की गति जैसे मुद्दों पर अधिक स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
यह सर्वे देश के विभिन्न क्षेत्रों के 1,096 बिजनेस लीडर्स के बीच किया गया, जिसमें MSME सेक्टर समेत कुल आठ प्रमुख उद्योगों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में यह सामने आया कि GST को अब लगभग पूरे देश में स्वीकार्यता मिल चुकी है, लेकिन इसके कार्यान्वयन से जुड़े कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक मुद्दे अब भी व्यापार जगत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
सर्वे के अनुसार, अधिकांश व्यवसायों ने माना कि GST ने देश में टैक्स प्रणाली को एकीकृत करने और व्यापार करने की प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहले की तुलना में टैक्स अनुपालन में पारदर्शिता बढ़ी है और राज्यों के बीच कर ढांचे में एकरूपता आई है।
हालांकि, इसके साथ ही कई उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि टैक्स कानूनों की व्याख्या को लेकर अब भी अस्पष्टता बनी हुई है। अलग-अलग परिस्थितियों में टैक्स नियमों की अलग-अलग व्याख्या होने के कारण व्यवसायों को अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा, रिफंड प्रक्रिया की गति को लेकर भी कारोबारियों ने चिंता जताई है। विशेष रूप से निर्यात से जुड़े व्यवसायों और MSME सेक्टर में काम करने वाले उद्यमियों ने कहा कि GST रिफंड समय पर न मिलने से उनकी नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) प्रभावित होती है, जिससे उनके संचालन पर दबाव बढ़ता है।
सर्वे में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की है कि GST प्रणाली को और अधिक सरल और स्पष्ट बनाया जाए। उनका कहना है कि नियमों की व्याख्या में एकरूपता लाने और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने से व्यापारिक माहौल और बेहतर हो सकता है।
MSME सेक्टर, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ने विशेष रूप से यह मांग रखी है कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और आसान बनाया जाए। कई उद्यमियों ने कहा कि डिजिटल सिस्टम के बावजूद तकनीकी जटिलताओं के कारण उन्हें समय-समय पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि GST लागू होने के बाद भारत की टैक्स व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक सुधार हुआ है, लेकिन इसके पूर्ण लाभ तभी मिलेंगे जब प्रशासनिक प्रक्रियाएं और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाई जाएंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैक्स प्रणाली में सुधार के लिए लगातार संवाद और फीडबैक जरूरी है, ताकि उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं को समझकर नीतिगत बदलाव किए जा सकें।
सरकार की ओर से भी समय-समय पर GST ढांचे में सुधार किए जाते रहे हैं, लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश मौजूद है, खासकर अनुपालन लागत और रिफंड प्रक्रिया को लेकर।
कुल मिलाकर, सर्वे यह संकेत देता है कि GST को लेकर व्यापार जगत में स्वीकार्यता काफी मजबूत है, लेकिन इसके साथ ही प्रणाली को और अधिक सरल, तेज और स्पष्ट बनाने की जरूरत भी बनी हुई है ताकि देश में व्यापार को और अधिक सुगम बनाया जा सके।