Gold Silver Price Crash: सोना-चांदी धड़ाम, जानें भारत में असर

Update: 2026-07-16 15:04 GMT

BUSINESS: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक और घरेलू बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर बनी हुई हैं, जिसके चलते कीमती धातुओं में अचानक बिकवाली बढ़ गई। इस गिरावट का असर दुनिया के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत एक बार फिर 4000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे पहुंच गई। वहीं, चांदी की कीमत भी गिरकर करीब 55 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई। कीमती धातुओं में आई इस गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है, क्योंकि हाल के दिनों में वैश्विक अस्थिरता के कारण सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर काफी पसंद किया जा रहा था।

भारतीय वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 1600 रुपये तक गिर गई, जबकि चांदी में 4000 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। इससे कमोडिटी बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों पर भी असर पड़ा है।

वहीं, दिल्ली के सराफा बाजार में स्थिति थोड़ी अलग रही। यहां सोने की कीमतें लगातार दूसरे दिन स्थिर बनी रहीं। हालांकि, चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 1500 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग के आधार पर भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी कोमेक्स पर सोने की कीमत गिरकर 3985 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। भारतीय मुद्रा के हिसाब से इसकी कीमत करीब 1.23 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठती है। दूसरी ओर, चांदी करीब 55.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई, जो भारतीय करेंसी के अनुसार लगभग 1.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों पर कई वैश्विक कारकों का असर पड़ता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय तनाव, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों में बदलाव और निवेशकों की धारणा प्रमुख हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण पहले जहां निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर बढ़ रहे थे, वहीं अब बाजार में मुनाफावसूली के चलते कीमतों में गिरावट आई है।

सोने को आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो इसकी मांग बढ़ जाती है। हालांकि, कीमतें बहुत अधिक बढ़ने के बाद निवेशक मुनाफा निकालना शुरू कर देते हैं, जिससे बाजार में गिरावट आ सकती है।

चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार की गतिविधियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमतों पर निवेश के साथ-साथ उद्योगों की मांग का भी असर पड़ता है।

भारतीय ग्राहकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका भी बन सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करने से पहले बाजार के रुझान और वैश्विक परिस्थितियों को समझना जरूरी है। कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी और गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

फिलहाल सोने और चांदी के बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। मिडिल ईस्ट तनाव, वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की चाल पर आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा निर्भर करेगी। निवेशकों और ग्राहकों की नजर अब अगले कारोबारी सत्रों पर टिकी हुई है।

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