मोदी सरकार की योजना में क्रेडिट कार्ड का लाभ

Update: 2026-08-10 16:04 GMT
नई दिल्ली : केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम स्वनिधि योजना देश के छोटे कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के चरणबद्ध तरीके से लोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा अब पात्र लाभार्थियों को 30 हजार रुपये तक की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड भी मिल सकता है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को रोजमर्रा के लेनदेन के लिए अतिरिक्त डिजिटल क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराना और उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को तीन चरणों में बिना गारंटी के लोन देने की व्यवस्था है। योजना के अनुसार पहले चरण में 15 हजार रुपये तक, दूसरे चरण में 25 हजार रुपये तक और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है। इससे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदार, ठेले वाले और छोटे स्तर पर सामान या सेवाएं बेचने वाले लोग अपने कारोबार के लिए पूंजी जुटा सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड की सुविधा सभी लाभार्थियों के लिए एक जैसी नहीं है। दिए गए विवरण के मुताबिक वे स्ट्रीट वेंडर्स इसके लिए पात्र हो सकते हैं, जिन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के तहत दूसरे चरण का लोन सफलतापूर्वक चुका दिया है और तीसरे चरण के लोन के लिए पात्र हैं या तीसरे चरण का लोन पहले ही ले चुके हैं। जिन लाभार्थियों ने तीसरे चरण का लोन भी चुका दिया है, वे भी इस सुविधा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सबसे खास बात यह है कि पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को 30 हजार रुपये तक की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे छोटे कारोबारी डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर निर्धारित क्रेडिट सीमा के भीतर खर्च कर सकेंगे। समय पर भुगतान करने वाले लाभार्थियों को ब्याज से जुड़ी राहत भी मिल सकती है। योजना का उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाना और उन्हें बैंकिंग सेवाओं के अधिक करीब लाना है।
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए स्ट्रीट वेंडर्स को कैशबैक प्रोत्साहन भी दिया जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार खुदरा और थोक डिजिटल लेनदेन के लिए पात्र विक्रेताओं को कुल 1,600 रुपये तक का कैशबैक प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को नकद लेनदेन पर निर्भरता कम करने और डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और वेंडिंग से संबंधित प्रमाण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कोविड अवधि से संबंधित वेंडिंग सर्टिफिकेट, सिफारिश पत्र यानी Letter of Recommendation या शहरी स्थानीय निकाय और संबंधित ब्लॉक कार्यालय की ओर से जारी पहचान पत्र भी मांगा जा सकता है। आवेदक को अपने बचत बैंक खाते का विवरण और वर्तमान पते का प्रमाण भी देना होगा।
पात्रता की बात करें तो दिए गए विवरण के अनुसार आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही आवेदक का किसी बैंक या वित्तीय संस्था में एनपीए या बट्टे खाते में डाला गया खाता नहीं होना चाहिए। यानी बैंकिंग रिकॉर्ड और पुराने कर्ज की स्थिति भी पात्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में बैंकों और कार्ड जारी करने वाली संस्थाओं को भी कुछ निर्देशों का पालन करना होगा। दिए गए विवरण के मुताबिक कार्ड जारी करते समय ग्राहक की सहमति के आधार पर बिल भुगतान के लिए ऑटो-डेबिट सुविधा डिफॉल्ट रूप से सक्रिय की जाएगी। यह सुविधा तब तक जारी रह सकती है, जब तक कार्डधारक खुद किसी दूसरे भुगतान माध्यम का विकल्प नहीं चुनता। बताया गया है कि पीएम स्वनिधि के संबंधित पोर्टल पर आवेदन के दौरान ही ऑटो-डेबिट के लिए सहमति ली जा सकती है।
पीएम स्वनिधि योजना का मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स को सिर्फ कर्ज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। छोटे कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अक्सर कारोबार शुरू करने या बढ़ाने के लिए पूंजी की होती है। ऐसे में बिना गारंटी वाले चरणबद्ध लोन और डिजिटल क्रेडिट की सुविधा उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। समय पर कर्ज चुकाने और डिजिटल लेनदेन करने से वे भविष्य में औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और मजबूत तरीके से जुड़ सकते हैं।
इस तरह पीएम स्वनिधि योजना के तहत पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को लोन के साथ डिजिटल क्रेडिट और कैशबैक जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। हालांकि आवेदन करने से पहले पात्रता, जरूरी दस्तावेज और संबंधित बैंक या आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध मौजूदा शर्तों की जांच करना जरूरी है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो।
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