Gold grams on MCX;असर 4 जून को शेयर मार्केट पर देखने को मिला. निवेशकों के मंगलवार को बाजार में एक समय पर करीब 43 लाख करोड़ रुपये दांव पर लग गए थे. हालांकि, बाजार ने कुछ रिकवरी जरूर की लेकिन फिर भी निफ्टी करीब 6 फीसदी टूटकर बंद हुआ. ऐसे में लोगों को एक दूसरे मजबूत निवेश विकल्प गोल्ड की याद आना लाजमी था. गोल्ड ऐसी विपरीत परिस्थितियों में हमेशा सपोर्ट के तौर पर सामने आता है.
सोने में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं देखने को मिली
है. तो क्या गोल्ड पर चुनाव के नतीजों का कोई असर नही होता? ऑगमॉन्ट गोल्ड के निदेशक सचिन कोठारी कहते हैं, “सोने की कीमतों पर लोकसभा चुनाव के नतीजों का कोई बड़ा प्रभाव नहीं होता है. भारत एक गोल्ड प्राइस टेकर है, गोल्ड की कीमतें लंदन से संचालित होती हैं. हालांकि, अलग-अलग राजनीतिक दल गोल्ड मार्केट पॉलिसी को किस तरह से देखते हैं, शुल्क वगैरह के संदर्भ में, इसका जरूर प्रभाव पड़ता है.” बता दें कि प्राइस टेकर का मतलब यहां इस बात से है कि भारत में होने वाली हलचल से गोल्ड की कीमतें प्रभावित नहीं होती बल्कि भारत बाहर तय हो रही कीमतों को अपना लेता है.
उनका कहना है, “भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने सोने के आयात पर अंकुश लगाने के लिए पिछले 10 वर्षों में सोने के आयात शुल्क को 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने 2012 और 2013 में सोने के आयात शुल्क को 0% से बढ़ाकर 10% कर दिया. इसलिए यह सब सोने की खपत, सोने के आयात, चालू खाते के घाटे और भारत में सोने की नीतियां कैसे बनती हैं, इस पर निर्भर करता है, न कि राजनीतिक दल की जीत या हार पर.”
सोना-चांदी खरीदने का बेहतरीन मौका कामाJewellery  के कॉलिन शाह का भी ऐसा ही कुछ मानना है. वह कहते हैं कि इंडस्ट्री बेहतर गवर्नेंस जारी रहने की ही  Hopeकर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय आभूषण इंडस्ट्री ने अच्छी वृद्धि की है. बकौल शाह, इंडस्ट्री ऐसे पॉलिसी रिफॉर्म्स की उम्मीद कर रही है जो इस बिजनेस के लिए सकारात्मक व्यापार माहौल तैयार करे. शाह ने कहा है कि एक बार फिर गोल्ड ने अपनी अहमियत को साबित किया है, जब पूरे मार्केट में कोहराम मचा था तब गोल्ड पर बहुत थोड़ा ही प्रभाव पड़ा.
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