New Delhi नई दिल्ली : भारत के ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण सुधार की दिशा में ‘एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’ (EBP) कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। रविवार को सरकार द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में इस कार्यक्रम के कई सकारात्मक प्रभावों को सामने रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक और पर्यावरणीय स्तर पर भी बड़े बदलाव ला रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और आयात पर निर्भरता भी घटती जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा, इस कार्यक्रम का सीधा असर पर्यावरण पर भी देखा गया है। एथेनॉल मिश्रण के कारण वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आई है, जिससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिली है। सरकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह पहल स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को तेज करती है।
रिपोर्ट में किसानों के लिए इस कार्यक्रम को एक लाभकारी मॉडल बताया गया है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और किसानों की आय में सुधार देखा जा रहा है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, EBP कार्यक्रम केवल ईंधन मिश्रण की नीति नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक और पर्यावरणीय सुधार योजना के रूप में काम कर रहा है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, आयात में कमी, प्रदूषण नियंत्रण और कृषि क्षेत्र को एक साथ जोड़ने की क्षमता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे एथेनॉल का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे देश की तेल आयात पर निर्भरता और कम होगी। साथ ही, यह कार्यक्रम भारत को स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।