नई दिल्ली: एनालिस्ट्स का कहना है कि US बॉन्ड यील्ड ज़्यादा होने और भारत के IPO मार्केट से बेहतर रिटर्न मिलने की वजह से FPI के पैसे निकालने का ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। FPI इन्वेस्टमेंट में एक और अहम ट्रेंड यह है कि भले ही वे लार्ज-कैप शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में लगातार खरीदारी कर रहे हैं।
एनालिस्ट्स ने कहा कि FPI मार्केट की तेज़ी का भी फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस महीने, 25 अगस्त तक एक्सचेंजों के ज़रिए कुल इक्विटी आउटफ़्लो (पैसे की निकासी) 25,682 करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि प्राइमरी मार्केट के ज़रिए FPI इन्वेस्टमेंट का ट्रेंड जारी है और कुल इन्वेस्टमेंट 8,551 करोड़ रुपये (25 सितंबर तक) रहा है।
एक्सचेंजों के ज़रिए बिकवाली और प्राइमरी मार्केट के ज़रिए इन्वेस्टमेंट के इस ट्रेंड की वजह से इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए कुल FPI बिकवाली 295,971 करोड़ रुपये और इस दौरान प्राइमरी मार्केट के ज़रिए कुल इन्वेस्टमेंट 54,398 करोड़ रुपये हो गया है।
कमज़ोर घरेलू और ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाज़ार लगातार सातवें हफ़्ते गिरावट के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स 0.54 प्रतिशत गिरकर 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.88 प्रतिशत गिरकर 23,140.50 पर बंद हुआ।
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहे, जिसमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप दोनों इंडेक्स में कमज़ोरी देखी गई। सेक्टर के हिसाब से परफ़ॉर्मेंस मिली-जुली रही, जिसमें टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सेक्टर सबसे ज़्यादा पिछड़ने वालों में शामिल रहे। इसके उलट, रियल्टी सेक्टर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेगमेंट बनकर उभरा।
एनालिस्ट्स ने कहा कि इस हफ़्ते कच्चे तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम मार्केट की धारणा को तय करने वाले मुख्य कारक रहे।
घरेलू ग्रोथ के बेहतर होते संकेतकों और मार्केट की कमज़ोर होती चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) के बीच अंतर यह बताता है कि बाहरी कारक ही निकट भविष्य में ज़्यादा असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर ज़्यादा स्पष्टता नहीं आती, तब तक उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
घरेलू ग्रोथ का बेहतर होता आउटलुक एक सकारात्मक कारक बना हुआ है, लेकिन बाहरी जोखिमों को देखते हुए नई पोजीशन लेने में सावधानी बरतने की ज़रूरत है।