Textile सेक्टर को राहत देने के लिए कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार

Update: 2026-04-28 15:09 GMT
New Delhi नई दिल्ली:देश के टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ती लागत और दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार कॉटन के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को घटाने या पूरी तरह समाप्त करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में Ministry of Textiles अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर व्यापक समीक्षा कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, टेक्सटाइल मंत्रालय Ministry of Agriculture and Farmers Welfare और Ministry of Finance के साथ विचार-विमर्श कर रहा है, ताकि कॉटन की उपलब्धता और कीमतों के बीच संतुलन बनाया जा सके। इस पहल का उद्देश्य उद्योग को सस्ती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध कराना है, जिससे उत्पादन लागत कम हो सके।
टेक्सटाइल उद्योग लंबे समय से बढ़ती कच्चे माल की कीमतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलने से कंपनियों को लागत कम करने में मदद मिल सकती है और उनका निर्यात भी बढ़ सकता है।
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि सेक्टर के लिए जरूरी इनपुट पर लगने वाली ड्यूटी में संशोधन किया जाए, ताकि उत्पादन प्रक्रिया में आने वाली लागत को और कम किया जा सके। इसके अलावा एक्सपोर्ट इंसेंटिव स्कीम्स की भी समीक्षा की जा रही है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कॉटन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने टेक्सटाइल कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित किया है। अगर ड्यूटी कम की जाती है, तो आयातित कॉटन सस्ता हो जाएगा, जिससे घरेलू उद्योग को राहत मिलेगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आयात ड्यूटी में किसी भी बदलाव से घरेलू कपास उत्पादकों पर नकारात्मक असर न पड़े। इसीलिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच संतुलित नीति बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक बाजार में टेक्सटाइल सेक्टर प्रतिस्पर्धा के नए दौर से गुजर रहा है। निर्यात बढ़ाने और उद्योग को मजबूत करने के लिए लागत नियंत्रण को अहम माना जा रहा है।
यदि कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती होती है, तो इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ेगा और कंपनियां अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पेश कर सकेंगी।
फिलहाल इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन संबंधित मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले समय में इस पर औपचारिक घोषणा की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम टेक्सटाइल सेक्टर को राहत देने और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
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