नई दिल्ली। डिजिटल कारोबार के बढ़ते दौर में छोटे व्यापारियों और MSME के लिए ऑनलाइन बाजार में पहुंच बनाना पहले से आसान हो गया है। इसी दिशा में Open Network for Digital Commerce यानी ONDC तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ONDC किसी एक ई-कॉमर्स कंपनी की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह एक ओपन नेटवर्क है, जहां छोटे कारोबारी अपने उत्पादों को कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचा सकते हैं। इससे दुकानदारों को बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
ONDC का मुख्य उद्देश्य छोटे व्यापारियों, स्थानीय दुकानदारों और MSME को डिजिटल बाजार से जोड़ना है। इस नेटवर्क के जरिए एक विक्रेता अपने सामान को अलग-अलग Buyer Apps पर दिखा सकता है, जिससे ग्राहकों तक पहुंच बढ़ने की संभावना रहती है।
ONDC पर दुकान खोलने की प्रक्रिया
ONDC पर सीधे दुकान का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है। इसके लिए व्यापारियों को ONDC से जुड़े Seller App या नेटवर्क पार्टनर प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़ना पड़ता है। सबसे पहले विक्रेता को अपनी जानकारी और जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
रजिस्ट्रेशन के लिए आमतौर पर व्यवसाय का नाम, दुकान का पता, मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी, पहचान पत्र, कैंसिल चेक, GST नंबर (जहां जरूरी हो) और अन्य KYC दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद व्यापारी अपने उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग कर सकता है।
KYC प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान की फोटो, कीमत, विवरण और उपलब्ध स्टॉक जैसी जानकारी अपलोड करनी होती है। इसके बाद उत्पाद ONDC नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग ग्राहक ऐप्स पर दिखाई देने लगते हैं। सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया कुछ कार्यदिवसों में पूरी हो सकती है।
दुकान खोलने में कितना खर्च आएगा?
ONDC पर दुकान शुरू करने का खर्च पूरी तरह Seller App और चुनी गई सर्विस पर निर्भर करता है। कुछ प्लेटफॉर्म छोटे व्यापारियों के लिए फ्री ऑनबोर्डिंग की सुविधा देते हैं, जबकि कुछ कंपनियां सेटअप, कैटलॉग तैयार करने और तकनीकी सहायता के लिए शुल्क ले सकती हैं।
कुछ एजेंसियां प्रोफेशनल सेटअप, उत्पाद अपलोड करने और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए करीब 25 हजार रुपये तक का शुल्क भी ले सकती हैं। हालांकि छोटे कारोबारी सामान्य सेवाओं के जरिए कम खर्च में भी ONDC से जुड़ सकते हैं।
ONDC खुद कोई निश्चित कमीशन चार्ज तय नहीं करता। Seller App, Buyer App और लॉजिस्टिक्स पार्टनर अपने-अपने हिसाब से फीस या कमीशन मॉडल लागू कर सकते हैं। इसलिए व्यापारियों को किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले उसके शुल्क और नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
ONDC से कितनी कमाई हो सकती है?
ONDC से होने वाली कमाई कई बातों पर निर्भर करती है। इसमें उत्पाद की मांग, कीमत, ग्राहकों की संख्या, बिक्री का मार्जिन और ऑर्डर की संख्या सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई दुकानदार रोजाना 20 ऑर्डर प्राप्त करता है और हर ऑर्डर की औसत कीमत 500 रुपये है, तो महीने में उसकी कुल बिक्री करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। अगर इसमें 15 से 20 प्रतिशत तक का नेट मार्जिन बचता है तो दुकानदार को लगभग 45 हजार से 60 हजार रुपये तक का लाभ हो सकता है।
हालांकि वास्तविक मुनाफा उत्पाद की लागत, डिलीवरी चार्ज, रिटर्न, पैकेजिंग और अन्य खर्चों पर निर्भर करेगा। ज्यादा बिक्री और बेहतर ग्राहक सेवा के जरिए कमाई बढ़ाई जा सकती है।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों फायदेमंद है ONDC?
ONDC की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें छोटे दुकानदार भी डिजिटल बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। पहले छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन बिक्री के लिए बड़े प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन ONDC उन्हें कई प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का अवसर देता है।
किराना दुकान, कपड़े, हस्तशिल्प, फूड बिजनेस, घरेलू उत्पाद और अन्य छोटे कारोबार ONDC के जरिए ऑनलाइन ग्राहक बना सकते हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों को अपने क्षेत्र से बाहर भी कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के साथ ONDC आने वाले समय में छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। हालांकि सफलता के लिए सही उत्पाद, अच्छी कीमत, समय पर डिलीवरी और बेहतर ग्राहक सेवा बेहद जरूरी होगी।