नई दिल्ली: शुक्रवार को 'यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस' (UFBU) की देशव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं, खासकर सरकारी बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ। यह हड़ताल हफ़्ते में पांच दिन काम करने की व्यवस्था को तुरंत लागू करने और वेतन से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने की मांग को लेकर की गई थी।
UFBU सात यूनियनों और लगभग 90 प्रतिशत बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। कई रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी बैंकों की ज़्यादातर शाखाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहीं क्योंकि कर्मचारी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
कई शाखाओं में कैश जमा करने, पैसे निकालने, चेक क्लियरेंस और प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ा, जबकि कुछ पुराने प्राइवेट बैंकों में भी कामकाज में रुकावट की खबर है। UPI और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहीं।
बैंक कर्मचारी संघ के नेताओं ने कहा कि उन्हें हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला और सरकार उनकी मांगों पर सहमत नहीं हुई।
ज़्यादातर सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को देशव्यापी हड़ताल के संभावित असर के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने कहा कि उसने सामान्य कामकाज के लिए इंतज़ाम किए हैं, लेकिन चेतावनी दी कि फिर भी काम प्रभावित हो सकता है।
यूनियनें मांग कर रही हैं कि शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए। उनका कहना है कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में इस बदलाव पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। अभी बैंक हर महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं।
अन्य मांगों में पेंशन लाभ में सुधार, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते का एक समान फ़ॉर्मूला और नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प शामिल है।
बैंकिंग यूनियन ने अगस्त में कहा था कि सितंबर में पहली हड़ताल के बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल होगी। उम्मीद है कि इन विरोध प्रदर्शनों से बैंकिंग कामकाज, खासकर सरकारी बैंकों में, काफ़ी हद तक प्रभावित होगा।
सितंबर के आखिर में यह असर और ज़्यादा दिखेगा, क्योंकि बैंक शाखाएं पहले से ही 26 सितंबर (चौथे शनिवार) और 27 सितंबर (रविवार) को बंद रहने वाली हैं।
हालांकि हड़ताल के दिनों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन बैंक और कैश व तकनीकी सेवाओं की उपलब्धता के आधार पर ATM और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रह सकती हैं। इसलिए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे शाखा-आधारित ज़रूरी लेन-देन की योजना उसी हिसाब से बनाएं।
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