ब्राजील सरकार ने ऑनलाइन चैटिंग प्लेटफॉर्म डिस्कॉर्ड (Discord) के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। सरकार ने बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा में कथित लापरवाही को लेकर कंपनी पर करीब 500 मिलियन ब्राजीलियन रियाल (लगभग 97 मिलियन डॉलर) के हर्जाने का मुकदमा दायर किया है। यह कार्रवाई एक नाबालिग की आत्महत्या से जुड़े मामले के बाद की गई है।
ब्राजील के सॉलिसिटर जनरल कार्यालय का आरोप है कि डिस्कॉर्ड ने बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर उम्र सत्यापन (Age Verification), पैरेंटल कंट्रोल और हानिकारक सामग्री को रोकने वाली व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां हैं।
आत्महत्या मामले के बाद बढ़ा विवाद
यह मामला जुलाई में सामने आए एक आत्महत्या प्रकरण के बाद चर्चा में आया। आरोप है कि डिस्कॉर्ड पर मौजूद कुछ समूहों और लाइव स्ट्रीमिंग गतिविधियों से जुड़ी परिस्थितियों ने इस घटना में भूमिका निभाई। इसके बाद ब्राजील के अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू की।
ब्राजील की डेटा सुरक्षा एजेंसी ने इससे पहले डिस्कॉर्ड की कुछ लाइव स्ट्रीमिंग सुविधाओं पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। सरकार का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए कंपनियों को ज्यादा जिम्मेदारी निभानी होगी।
सरकार ने रखीं ये मांगें
ब्राजील सरकार ने अदालत से मांग की है कि डिस्कॉर्ड को—
मजबूत उम्र सत्यापन प्रणाली लागू करने,
माता-पिता के लिए बेहतर नियंत्रण सुविधाएं देने,
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने,
खतरनाक और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की पहचान के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम लगाने
का आदेश दिया जाए।
डिस्कॉर्ड ने आरोपों को बताया गलत
वहीं डिस्कॉर्ड ने ब्राजील सरकार की कार्रवाई को "अनुपातहीन" बताया है। कंपनी का कहना है कि वह सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के पालन के लिए लगातार काम कर रही है और सरकार के आरोप उसके प्रयासों को सही तरीके से नहीं दर्शाते।
दुनियाभर में बढ़ रहा सोशल मीडिया पर दबाव
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनिया के कई देशों में टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। सरकारें सोशल मीडिया और चैटिंग प्लेटफॉर्म से उम्र जांच, डेटा सुरक्षा और हानिकारक कंटेंट रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग कर रही हैं।
डिस्कॉर्ड पर ब्राजील की यह कार्रवाई डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती वैश्विक बहस का हिस्सा बन गई है।
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