नई दिल्ली। देश में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और रोजगार के नए अवसरों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत के संगठित क्षेत्र में रोजगार वृद्धि की रफ्तार बेहतर हो सकती है। कंपनियों की आमदनी में सुधार और उपभोक्ता मांग बढ़ने से नई भर्तियों को समर्थन मिलने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में संगठित क्षेत्र में रोजगार वृद्धि पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 2,200 सूचीबद्ध कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इन कंपनियों में कुल 1.04 करोड़ कर्मचारी कार्यरत हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रोजगार वृद्धि की दर घटकर सिर्फ 1.8 प्रतिशत रह गई थी।
पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची रोजगार वृद्धि
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में संगठित क्षेत्र में रोजगार सृजन की रफ्तार काफी धीमी रही। रोजगार वृद्धि दर सालाना आधार पर घटकर 1.8 प्रतिशत रह गई, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है।वित्त वर्ष 2024-25 में यह दर लगभग 2.7 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की गति में कमी आई है।रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकांश क्षेत्रों में भर्ती की रफ्तार धीमी रही। विशेष रूप से वित्तीय सेवा क्षेत्र में नई नियुक्तियों की गति कमजोर पड़ी।हालांकि, रोजगार वृद्धि धीमी होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई, लेकिन नई नियुक्तियों की कुल गति पिछले वर्षों की तुलना में कम रही।
कंपनियों की कमाई बढ़ने से बढ़ सकते हैं रोजगार
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कंपनियों की आय और कर्मचारियों की संख्या के बीच महत्वपूर्ण संबंध बताया है।रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र को छोड़कर जिन कंपनियों ने FY26 में 20 प्रतिशत से अधिक राजस्व वृद्धि दर्ज की, उनके कर्मचारियों की संख्या में औसतन 9.1 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।वहीं, जिन कंपनियों का राजस्व 10 से 20 प्रतिशत के बीच बढ़ा, उनमें कर्मचारियों की संख्या 4.4 प्रतिशत बढ़ी।इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बेहतर कारोबारी प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में नई नियुक्तियों की संभावना अधिक रही।जेफरीज का अनुमान है कि FY27 में कंपनियों की आय बढ़ने से भर्ती गतिविधियों में भी सुधार आ सकता है।
ऑटोमोबाइल और ट्रैवल सेक्टर में बेहतर संभावनाएं
रिपोर्ट में ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में बेहतर कारोबारी प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।इन क्षेत्रों को विवेकाधीन उपभोग यानी ऐसी खरीदारी से जुड़ा माना जाता है, जिन पर लोग अपनी जरूरत और आय के अनुसार खर्च करते हैंऑटोमोबाइल क्षेत्र में वाहनों की मांग, इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री और पर्यटन गतिविधियों में सुधार से कंपनियों की आमदनी बढ़ सकती है।यदि इन क्षेत्रों में मांग मजबूत रहती है, तो उत्पादन, बिक्री, ग्राहक सेवा और अन्य संबंधित गतिविधियों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना बन सकती है।
सैलरी बढ़ी, लेकिन नई भर्तियों की रफ्तार धीमी
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में कर्मचारियों की संख्या में सीमित बढ़ोतरी के बावजूद वेतन और कर्मचारी खर्च में वृद्धि दर्ज की गई।करीब 54 प्रतिशत कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई। वहीं, कुल कर्मचारी खर्च बढ़कर लगभग 13.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।हालांकि, कर्मचारियों पर खर्च बढ़ने और नई नियुक्तियां बढ़ने को एक समान नहीं माना जा सकता। वेतन वृद्धि, वरिष्ठ कर्मचारियों का पारिश्रमिक और अन्य लाभ भी कुल कर्मचारी खर्च को प्रभावित करते हैं।
कमजोर मानसून और GST लाभ घटने से जोखिम
जेफरीज ने रोजगार वृद्धि की संभावनाओं के साथ कुछ आर्थिक जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है।रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा वस्तु एवं सेवा कर यानी GST से मिले लाभ का असर धीरे-धीरे कम होने से उपभोक्ता खर्च की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।कंपनियों की आय में अपेक्षित सुधार नहीं होने की स्थिति में भर्ती गतिविधियों की रफ्तार भी सीमित रह सकती है।
आने वाले महीनों में रोजगार बाजार पर रहेगी नजर
जेफरीज का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में संगठित क्षेत्र के रोजगार बाजार में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।हालांकि, नई नौकरियों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियों की बिक्री, मुनाफा और व्यावसायिक गतिविधियों में कितना सुधार होता है।रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी और मजबूत उपभोक्ता मांग रोजगार सृजन को बढ़ावा दे सकती है।ऐसे में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए आने वाले महीनों में ऑटोमोबाइल, ट्रैवल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और अन्य तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में अवसरों पर नजर रखना उपयोगी हो सकता है।
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