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DMCH की इमरजेंसी बिल्डिंग के पास छलके जाम? वायरल CCTV के बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

nidhi
17 Oct 2026 1:56 PM IST
DMCH की इमरजेंसी बिल्डिंग के पास छलके जाम? वायरल CCTV के बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
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दरभंगा मेडिकल कॉलेज में कथित शराब पार्टी का वीडियो वायरल
दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) परिसर में कथित शराब पार्टी का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर प्रसारित सीसीटीवी फुटेज में कुछ महिलाएं और पुरुष सीढ़ियों के पास बैठकर गिलासों में पेय पदार्थ डालते और पीते दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि गिलासों में शराब परोसी जा रही थी। मामले का संज्ञान लेते हुए बेंता थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अस्पताल प्रशासन ने भी वीडियो की सत्यता और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं।
वायरल फुटेज अस्पताल की इमरजेंसी बिल्डिंग में सीढ़ियों से सटे बरामदे का बताया जा रहा है। वीडियो की शुरुआत में दो महिलाएं खाने-पीने के सामान और कोल्ड ड्रिंक के साथ बैठी नजर आती हैं, जबकि एक अन्य महिला पास में खड़ी दिखाई देती है। कुछ पुरुष भी वहां पहुंचते हैं। इसके बाद एक व्यक्ति कथित तौर पर अपने पास से शराब का पैकेट निकालकर महिला को देता दिखाई देता है। महिला गिलासों में पेय पदार्थ डालती नजर आती है। फुटेज में कुल छह लोग दिखाई देने और उनमें से चार के कथित शराब सेवन में शामिल होने की बात सामने आई है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और अस्पताल से उनके संबंध का है। शुरुआती खबरों में महिलाओं को सफाईकर्मी और एक पुरुष को ट्रॉली कर्मचारी बताया गया है। हालांकि, पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय संबंधित लोग ड्यूटी पर थे या नहीं। ऐसे में वीडियो के आधार पर सभी को अस्पताल का नियमित कर्मचारी मान लेना या ड्यूटी के दौरान शराब सेवन का आरोप अंतिम रूप से सही ठहरा देना जल्दबाजी होगी।
दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बेंता थाना पुलिस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, रिकॉर्डिंग का स्थान और उसमें दिखाई देने वाले लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। पुलिस अस्पताल की अतिरिक्त सीसीटीवी फुटेज हासिल करके घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की तैयारी में है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित लोग वहां कब पहुंचे और कथित घटना किन परिस्थितियों में हुई।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने भी मामले की जांच कराने की बात कही है। उनके अनुसार, वीडियो की सत्यता की पुष्टि और संबंधित कर्मियों की पहचान के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि परिसर में निगरानी की व्यवस्था क्या थी और यदि आरोप सही हैं तो ऐसी गतिविधि वहां कैसे हुई।
वीडियो की तारीख को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। फुटेज पर नौ जून की तारीख दिखाई देने की बात सामने आई है, जबकि अस्पताल के सुरक्षा प्रभारी ने इसे पुराना बताया है। हालांकि, रिकॉर्डिंग की वास्तविक तारीख की निर्णायक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर वीडियो के हाल में प्रसारित होने को घटना के हाल में घटने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जांच में मूल रिकॉर्डिंग और अस्पताल के संबंधित रिकॉर्ड अहम होंगे। इसी बीच ट्रॉली सुपरवाइजर की ओर से वीडियो में दिखाई देने वाले एक कर्मचारी को पहले ही बर्खास्त किए जाने का दावा भी किया गया है। इस दावे को अस्पताल प्रशासन की जांच के नतीजे से अलग समझना जरूरी है। संबंधित कर्मचारी के रोजगार और कार्रवाई के रिकॉर्ड से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसी व्यापक विभागीय कार्रवाई को पूरा हुआ मानने का आधार नहीं है।
अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में कथित शराब सेवन का मामला कर्मचारियों के आचरण, निगरानी और जवाबदेही से जुड़े सवाल सामने लाता है। खासकर इमरजेंसी सेवाओं के आसपास ऐसी गतिविधि का आरोप गंभीर है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस कथित घटना के कारण किसी मरीज का इलाज प्रभावित होने की पुष्टि नहीं है। अब पुलिस और अस्पताल प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना तथ्य है और किसके विरुद्ध क्या कार्रवाई बनती है।
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