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शी जिनपिंग की सख्त कार्रवाई, 16 सैन्य अफसरों समेत 33 नेताओं की छुट्टी
Ratna Netam
30 Oct 2026 6:03 PM IST

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बीजिंग। चीन की राजनीति और सैन्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए केंद्रीय समिति के 33 पूर्ण और वैकल्पिक सदस्यों को पार्टी से निष्कासित करने की पुष्टि की है। इनमें 16 वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति की पांचवीं पूर्ण बैठक में इस कार्रवाई को औपचारिक मंजूरी दी गई। इसे हाल के दशकों में कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हुई सबसे व्यापक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बीजिंग में 26 से 29 अक्टूबर 2026 तक आयोजित चार दिवसीय बैठक में पार्टी अनुशासन, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और नेतृत्व व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में अधिकारियों के खिलाफ पहले की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने के बाद उनके निष्कासन को मंजूरी दी गई। पार्टी नेतृत्व ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाना संगठन को मजबूत बनाए रखने और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
इस बैठक में सबसे अधिक चर्चा केंद्रीय समिति के सदस्यों की अनुपस्थिति को लेकर रही। वर्ष 2022 में गठित केंद्रीय समिति में पूर्ण और वैकल्पिक सदस्यों सहित कुल 376 सदस्य थे, लेकिन इस बार बैठक में केवल 279 सदस्य ही शामिल हुए। इनमें 162 पूर्ण और 117 वैकल्पिक सदस्य थे। इस प्रकार मूल सदस्य संख्या के मुकाबले लगभग 25.8 प्रतिशत सदस्य बैठक में उपस्थित नहीं थे। माओत्से तुंग के बाद के दौर में केंद्रीय समिति की बैठकों में यह सबसे कम उपस्थिति दर बताई जा रही है। हालांकि, अनुपस्थित सभी सदस्यों को निष्कासित नहीं किया गया है और प्रत्येक की अनुपस्थिति का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कम्युनिस्ट पार्टी की कार्रवाई का सबसे अधिक असर चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पर पड़ा है। निष्कासित किए गए 33 अधिकारियों में 16 सैन्य क्षेत्र से जुड़े हैं। इनमें केंद्रीय सैन्य आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष झांग योउशिया और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लियू झेनली जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन दोनों अधिकारियों को चीन की सैन्य कमान व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता था। इसके अलावा सैन्य अभियानों, राजनीतिक मामलों और क्षेत्रीय कमान से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि हुई है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सेना में पिछले कुछ वर्षों से लगातार उच्चस्तरीय बदलाव किए जा रहे हैं। वर्ष 2022 में गठित सात सदस्यीय केंद्रीय सैन्य आयोग के पांच सदस्य अब पद से हटाए जा चुके हैं। वर्तमान में इस सर्वोच्च सैन्य निकाय में केवल राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उपाध्यक्ष झांग शेंगमिन शेष हैं। झांग शेंगमिन सैन्य अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी जांच से जुड़े रहे हैं। उन्हें हालिया बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी के शक्तिशाली पोलित ब्यूरो में भी शामिल किया गया है।
केंद्रीय सैन्य आयोग चीन की सेना से जुड़े महत्वपूर्ण रणनीतिक, प्रशासनिक और नेतृत्व संबंधी फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में आयोग के अधिकांश पद खाली होने से सैन्य नेतृत्व की संरचना और भविष्य में नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि इन रिक्तियों ने सेना की दैनिक परिचालन क्षमता को किस हद तक प्रभावित किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रही कार्रवाई से सैन्य नेतृत्व के भीतर जवाबदेही और राजनीतिक अनुशासन पर जोर बढ़ रहा है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि वरिष्ठ अधिकारियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से अनुभवी नेतृत्व की कमी पैदा हो सकती है और महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कम्युनिस्ट पार्टी की कार्रवाई केवल सैन्य अधिकारियों तक सीमित नहीं रही है। निष्कासित प्रमुख नेताओं में शिनजियांग के पूर्व पार्टी सचिव मा शिंगरुई और पूर्व वरिष्ठ राजनयिक लियू जियानचाओ का नाम भी शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रशासन, उद्योग और वित्तीय संस्थाओं से जुड़े कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आधिकारिक घोषणाओं में गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों का उल्लेख किया गया है, हालांकि सभी व्यक्तियों के खिलाफ लगे आरोपों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को अपनी प्रमुख नीतियों में शामिल किया था। इस अभियान के तहत सरकारी विभागों, पार्टी संगठनों और सेना के हजारों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। चीन की सरकार इसे प्रशासनिक पारदर्शिता, अनुशासन और संस्थागत सुधार की दिशा में आवश्यक कदम बताती रही है।
दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक विश्लेषक इन कार्रवाइयों को पार्टी नेतृत्व के भीतर शक्ति संतुलन और राजनीतिक निष्ठा से भी जोड़कर देखते हैं। उनका तर्क है कि अनुशासनात्मक अभियान के कारण शीर्ष नेतृत्व के पास नियुक्तियों और महत्वपूर्ण फैसलों पर अधिक नियंत्रण केंद्रित हो सकता है। हालांकि, इन राजनीतिक व्याख्याओं और भ्रष्टाचार के आधिकारिक आरोपों के बीच अंतर करना आवश्यक है।
इस बार की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी 21वीं राष्ट्रीय कांग्रेस वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में बीजिंग में आयोजित करने का फैसला किया है। इस आयोजन में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह संभावना जताई जा रही है कि शी जिनपिंग पार्टी महासचिव के रूप में एक और कार्यकाल हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
बैठक में पार्टी नेतृत्व ने संगठन के भीतर अनुशासन मजबूत करने, भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखने और युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। पार्टी के आधिकारिक बयान में कहा गया कि पिछली कार्रवाइयों से प्रशासन और सेना के भीतर मौजूद गंभीर समस्याओं को दूर करने में सहायता मिली है। नेतृत्व ने संगठन की दीर्घकालिक मजबूती के लिए निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई।
फिलहाल 33 वरिष्ठ अधिकारियों के निष्कासन और केंद्रीय सैन्य आयोग में खाली पदों के कारण चीन की राजनीतिक तथा सैन्य नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव का दौर जारी है। आगामी महीनों में नई नियुक्तियों और वर्ष 2027 की पार्टी कांग्रेस की तैयारियों पर विशेष नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन सरकार सैन्य नेतृत्व में रिक्त पदों को किस तरह भरती है और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान आगे किस दिशा में बढ़ता है।
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