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भारत अर्जेंटीना के व्यापारिक रिश्तों में बड़ी छलांग, आर्थिक साझेदारी हुई मजबूत

Ratna Netam
30 Oct 2026 5:52 PM IST
भारत अर्जेंटीना के व्यापारिक रिश्तों में बड़ी छलांग, आर्थिक साझेदारी हुई मजबूत
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नई दिल्ली। भारत और अर्जेंटीना के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कॉसिनो (Mariano Agustín Caucino) ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन गया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार का विस्तार हो रहा है और कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, खनन तथा महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक भूमिका को भी द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार का महत्वपूर्ण कारण बताया।राजदूत कॉसिनो ने 17वें कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन के दौरान कहा था कि भारत और अर्जेंटीना के संबंध केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक हित एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था जहां खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और औद्योगिक कच्चे माल की मांग पैदा करती है, वहीं अर्जेंटीना अपनी कृषि उत्पादन क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा के कारण इन आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।राजदूत के मुताबिक, अर्जेंटीना के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में ब्राजील, चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और चिली के बाद भारत का स्थान है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों का मूल्य लगभग छह अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। सितंबर 2026 में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजदूत ने बताया कि 2025 का द्विपक्षीय आर्थिक कारोबार लगभग 6.5 अरब डॉलर रहा। यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लगातार विस्तार को दर्शाता है।
कृषि और खाद्य तेलों के क्षेत्र में बढ़ रहा सहयोग
भारत और अर्जेंटीना के आर्थिक संबंधों में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अर्जेंटीना दुनिया के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल है और सोयाबीन, मक्का, गेहूं तथा खाद्य तेलों के उत्पादन में उसकी मजबूत स्थिति है। दूसरी ओर, भारत में खाद्य तेलों की बड़ी घरेलू मांग है, जिसे पूरा करने के लिए आयात भी करना पड़ता है।राजदूत कॉसिनो ने बताया कि अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेलों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। विशेष रूप से सोयाबीन तेल की आपूर्ति में अर्जेंटीना की महत्वपूर्ण भूमिका है। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन तेल आपूर्तिकर्ता और सूरजमुखी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। अर्जेंटीना के उत्पादकों को भारत जैसा बड़ा बाजार उपलब्ध होता है, जबकि भारत को खाद्य तेलों की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त और भरोसेमंद विकल्प मिलते हैं।
लिथियम और महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष ध्यान
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र लिथियम और महत्वपूर्ण खनिज हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण दुनियाभर में लिथियम की मांग बढ़ रही है।अर्जेंटीना लिथियम संसाधनों के मामले में महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।राजदूत कॉसिनो ने कहा कि खनन क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की शुरुआत हो चुकी है। भविष्य में लिथियम सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में निवेश और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खनिज संसाधनों की उपलब्धता और भारत की औद्योगिक मांग दोनों देशों को दीर्घकालिक सहयोग के अवसर प्रदान करती है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी खुलेंगे नए अवसर
भारत और अर्जेंटीना ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। अर्जेंटीना के पास पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी व्यापक अवसर मौजूद हैं।राजदूत के अनुसार, ऊर्जा सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में इसमें महत्वपूर्ण वृद्धि हो सकती है। भारत ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में अर्जेंटीना उसके लिए एक संभावित साझेदार बन सकता है।दोनों देशों के बीच ऊर्जा प्रौद्योगिकी, निवेश और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में भी सहयोग की संभावनाएं हैं।
पीएम मोदी की अर्जेंटीना यात्रा से संबंधों को मिली गति
राजदूत कॉसिनो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 की अर्जेंटीना यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।भारत और अर्जेंटीना ने वर्ष 2019 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद व्यापार, निवेश, कृषि, ऊर्जा और खनन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।कॉसिनो ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनयिक संबंध रहे हैं। अर्जेंटीना ने वर्ष 1950 में नई दिल्ली में अपना दूतावास स्थापित किया था। दोनों देश जी-20 के सदस्य भी हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग करते रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी सहयोग की संभावना
पारंपरिक व्यापारिक क्षेत्रों के अलावा भारत और अर्जेंटीना आधुनिक तकनीक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान राजदूत कॉसिनो ने कहा था कि दोनों देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के लिए सुधार कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।उनके अनुसार, अर्जेंटीना स्वयं को एआई के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है। भारत का मजबूत तकनीकी क्षेत्र और अर्जेंटीना की नई आर्थिक नीतियां इस दिशा में सहयोग के अवसर प्रदान कर सकती हैं।
भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को बताया महत्वपूर्ण
राजदूत मारियानो कॉसिनो ने कहा कि भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका तेजी से बढ़ रही है। बड़ी आबादी, विशाल घरेलू बाजार और बढ़ते औद्योगिक निवेश के कारण भारत दुनिया के महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों में शामिल हो चुका है।उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद भारत और अर्जेंटीना के बीच आर्थिक सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। दोनों देशों के पास ऐसी क्षमताएं और संसाधन हैं, जिनका संयुक्त उपयोग व्यापार और निवेश को बढ़ावा दे सकता है।राजदूत ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में कृषि, खाद्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत होगी।भारत का अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बनना दोनों देशों के बढ़ते व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण संकेत है। अब भविष्य में नए निवेश, व्यापार समझौतों और औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से इस आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहेगा।
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