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उइगर अधिकारों को लेकर WUC का ऐलान 1 अक्टूबर को दो शहरों में प्रदर्शन
Ratna Netam
29 Sept 2026 4:34 PM IST

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बर्लिन। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने 1 अक्टूबर को तुर्किये के इस्तांबुल और जर्मनी की राजधानी बर्लिन में चीन के राजनयिक मिशनों के बाहर प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि इन प्रदर्शनों के जरिए चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में उइगर समुदाय और अन्य समूहों के मानवाधिकारों तथा स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। WUC एक अंतरराष्ट्रीय उइगर संगठन है, जिसका मुख्यालय जर्मनी के म्यूनिख में है और जो उइगर अधिकारों के लिए अभियान चलाता है।WUC के मुताबिक इस्तांबुल में प्रदर्शन सारियर जिले स्थित चीनी कॉन्सुलेट जनरल के बाहर स्थानीय समय के अनुसार सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा। संगठन ने इस कार्यक्रम के लिए “ईस्ट तुर्किस्तान ने 77 सालों से विरोध किया है- कब्जे को मंजूरी नहीं” संदेश दिया है। “ईस्ट तुर्किस्तान” शब्द का इस्तेमाल WUC और कुछ उइगर संगठन शिनजियांग क्षेत्र के लिए करते हैं, जबकि चीन आधिकारिक तौर पर इसे शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के रूप में मान्यता देता है।
इस्तांबुल में होने वाली सभा के दौरान WUC की ओर से एक प्रेस बयान भी जारी किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि इसमें चीन की नीतियों, उइगरों की स्थिति और मानवाधिकारों से जुड़े उसके आरोपों का उल्लेख किया जाएगा। WUC का आरोप है कि शिनजियांग में उइगरों की धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए हैं।इस्तांबुल के अलावा बर्लिन में भी 1 अक्टूबर को प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। WUC के अनुसार प्रदर्शन शाम 4 बजे से 6 बजे तक चीनी दूतावास के बाहर होगा। इसमें संगठन के साथ दूसरे सहयोगी समूह भी हिस्सा लेंगे। प्रदर्शनकारी चीन की नीतियों से प्रभावित बताए जाने वाले उइगर और दूसरे समुदायों के प्रति समर्थन व्यक्त करेंगे और मानवाधिकार तथा स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
1 अक्टूबर चीन के लिए महत्वपूर्ण तारीख है, क्योंकि इसी दिन पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की वर्षगांठ मनाई जाती है। इसी तारीख पर पहले भी दुनिया के अलग-अलग शहरों में उइगर, तिब्बती और दूसरे समूह चीन की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करते रहे हैं। इस्तांबुल में भी पिछले वर्षों में चीनी कॉन्सुलेट के बाहर उइगर समुदाय के प्रदर्शनों के उदाहरण सामने आए हैं।WUC खुद को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से उइगरों के मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाला संगठन बताता है। संगठन की स्थापना 2004 में हुई थी। इसके कार्यालय म्यूनिख, बर्लिन, ब्रसेल्स और इस्तांबुल में हैं और यह विभिन्न देशों में उइगर संगठनों के साथ काम करता है।
उइगर समुदाय की स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है। मानवाधिकार संगठनों और कई पश्चिमी देशों ने शिनजियांग में बड़े पैमाने पर हिरासत, धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, निगरानी और जबरन श्रम जैसे आरोप लगाए हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों के नेताओं ने भी इस मुद्दे को चीन के साथ बातचीत में उठाया है।वहीं चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। चीनी सरकार का कहना है कि शिनजियांग से संबंधित उसकी नीतियों का उद्देश्य आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक कट्टरपंथ से निपटना है। चीन ने पूर्व में संचालित व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण केंद्रों को आतंकवाद और कट्टरपंथ रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था बताया है और दावा किया है कि शिनजियांग में सभी जातीय समूहों के अधिकार कानून के तहत सुरक्षित हैं।
चीनी अधिकारियों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास में सुधार हुआ है तथा मानवाधिकार उल्लंघन के कई आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। इस मुद्दे पर चीन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के दावों में लंबे समय से गहरा मतभेद बना हुआ है।WUC ने अपने आगामी प्रदर्शनों को इसी व्यापक मानवाधिकार अभियान का हिस्सा बताया है। संगठन का कहना है कि इस्तांबुल और बर्लिन की सभाओं के जरिए वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान उइगरों की स्थिति की ओर फिर से आकर्षित करना चाहता है। संगठन ने उइगर समुदाय के लोगों और सहयोगी संगठनों से कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है।
बर्लिन में WUC की मौजूदगी पहले से है और संगठन का वहां स्थायी कार्यालय भी संचालित होता है। जर्मनी में बड़ी संख्या में उइगर कार्यकर्ता और मानवाधिकार समूह चीन से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाते रहे हैं। वहीं तुर्किये में भी उइगर समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी के कारण इस्तांबुल लंबे समय से उइगर मुद्दों से जुड़े प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है।1 अक्टूबर के इन प्रदर्शनों में WUC चीन की नीतियों के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराएगा और उइगर समुदाय के अधिकारों तथा स्वतंत्रता के समर्थन की मांग करेगा। दूसरी ओर चीन ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी शिनजियांग नीतियों को सुरक्षा, विकास और आतंकवाद विरोधी उपायों का हिस्सा बताता रहा है। ऐसे में इस्तांबुल और बर्लिन के कार्यक्रम एक बार फिर शिनजियांग और उइगर अधिकारों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय बहस को सामने लाएंगे।
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