
वर्ल्ड | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि अगर वे फिर से सत्ता में आते हैं, तो विदेश में बने वाहनों पर 25% टैरिफ लगाएंगे। इस फैसले से ऑटोमोबाइल बाजार में हलचल मच गई है, क्योंकि इससे कारों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ सकता है।
क्या है ट्रंप का टैरिफ प्लान?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को विदेशी कारों से बचाने के लिए यह कदम जरूरी है। उनका दावा है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और अमेरिकी कार निर्माता कंपनियों को फायदा होगा।
"हम अपने ऑटोमोबाइल उद्योग को फिर से मजबूत बनाएंगे और अमेरिका में बनी कारों को प्राथमिकता देंगे," ट्रंप ने अपने भाषण में कहा।
महंगी हो सकती हैं कारें
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस टैरिफ से अमेरिका में कारों की कीमतें 10% से 20% तक बढ़ सकती हैं। चूंकि अमेरिका में बेची जाने वाली कई कारें जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोप और मैक्सिको से आती हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह टैरिफ लागू होता है, तो एक औसत कार की कीमत में करीब $5,000 से $10,000 तक का इजाफा हो सकता है। इससे न सिर्फ उपभोक्ता प्रभावित होंगे, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री भी घट सकती है।
नौकरियों पर भी असर
ट्रंप भले ही इसे घरेलू कार उद्योग के लिए अच्छा कदम बता रहे हों, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे नौकरियों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े हजारों अमेरिकी कामगार उन कंपनियों में काम करते हैं, जो विदेशी पार्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। अगर टैरिफ बढ़ता है, तो ये कंपनियां नुकसान में जा सकती हैं और नौकरियां कट सकती हैं।
अमेरिकी ऑटो डीलर्स एसोसिएशन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, "यह उपभोक्ताओं और कार कंपनियों के लिए बड़ा झटका होगा। इससे नौकरियां भी प्रभावित होंगी।"
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस एलान पर जापान, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों ने चिंता जताई है। वे अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं और यह नीति लागू करते हैं, तो अमेरिका को व्यापारिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
आगे क्या?
अगर यह टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिकी कार बाजार में बड़ी उथल-पुथल मच सकती है। उपभोक्ताओं को महंगी कारें खरीदनी पड़ेंगी, नौकरियों पर असर पड़ेगा और अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।





