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World News : तुर्की में सियासी घमासान

Uma Verma
27 March 2025 8:24 AM IST
World News : तुर्की में सियासी घमासान
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वर्ल्ड | तुर्की में सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने विपक्ष पर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इस्तांबुल के मेयर की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव से तुर्की की राजनीति में अस्थिरता का माहौल बन गया है।

विपक्ष पर एर्दोआन के आरोप

राष्ट्रपति एर्दोआन ने एक सभा में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को अस्थिर करने के लिए आर्थिक संकट को हथियार बनाया जा रहा है।

"हमने तुर्की को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, लेकिन विपक्ष लगातार अफवाहें फैलाकर बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। उनका मकसद केवल सरकार को गिराना है, न कि देश को आगे बढ़ाना," एर्दोआन ने कहा।

हालांकि, विपक्षी दलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि आर्थिक संकट की असली वजह सरकार की नीतियां हैं, न कि विपक्ष की साजिश।

मेयर की गिरफ्तारी से भड़के प्रदर्शन

तुर्की में हाल ही में इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। इमामोग्लू, जो प्रमुख विपक्षी नेता भी हैं, लंबे समय से एर्दोआन की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

इस्तांबुल, अंकारा और कई अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है और विपक्षी नेताओं को झूठे आरोपों में फंसाकर दबाने की कोशिश कर रही है।

"यह लोकतंत्र पर हमला है। सरकार विपक्षी नेताओं को जेल में डालकर एकतरफा शासन कायम करना चाहती है," एक प्रदर्शनकारी ने कहा।

तुर्की में बढ़ता राजनीतिक संकट

विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की में राजनीतिक तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। एक तरफ सरकार विपक्ष पर साजिश रचने के आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों से असंतोष बढ़ रहा है। इससे पहले भी सरकार ने कई पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था, जिससे तुर्की में मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

अर्थव्यवस्था की हालत भी खराब है। मुद्रास्फीति चरम पर है, बेरोजगारी बढ़ रही है और तुर्की की मुद्रा लीरा कमजोर हो रही है। ऐसे में एर्दोआन और विपक्ष के बीच संघर्ष से देश में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

तुर्की में बढ़ते राजनीतिक संकट पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका पहले ही तुर्की सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की अपील कर चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति काबू में नहीं आई, तो यह तुर्की के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई और बढ़ी, तो यूरोपीय देशों से तुर्की पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे क्या?

तुर्की में सत्ता संघर्ष और विपक्ष की बढ़ती मुश्किलें संकेत देती हैं कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। विपक्षी दल अपनी रणनीति बना रहे हैं, जबकि सरकार सख्ती बरतने के मूड में दिख रही है।

अगर हालात नहीं सुधरे, तो तुर्की को न सिर्फ राजनीतिक बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।


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