
वर्ल्ड | नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों द्वारा राजशाही की बहाली की कोशिशें तेज हो गई हैं। कट्टरपंथी हिंदू संगठनों के सहयोग से इसे आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
राजशाही की वापसी की मुहिम
हाल के महीनों में ज्ञानेंद्र शाह ने कई राजशाही समर्थक समूहों और हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों से मुलाकात की है। उनका दावा है कि नेपाल में संसदीय लोकतंत्र कमजोर हो चुका है और देश को फिर से राजशाही की जरूरत है।
राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में राजशाही समर्थक रैलियां निकाली गई हैं, जहां नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने और राजा को सत्ता सौंपने की मांग उठी।
लोकतांत्रिक संगठनों का विरोध
नेपाल के नागरिक समाज और कई राजनीतिक दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद नेपाल ने लोकतंत्र का रास्ता अपनाया था, जिसे अब फिर से कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
विरोधियों का कहना है कि नेपाल की जनता राजशाही के खिलाफ खड़ी थी और अब इसे वापस लाने का प्रयास देश को पीछे धकेलने जैसा होगा।
नेपाली राजनीति में नई हलचल
नेपाल पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। राजशाही समर्थकों की बढ़ती गतिविधियों से सरकार की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान तेज होने की संभावना है।





