
वॉशिंगटन : अमेरिका और इराक के बीच हुए नए समझौते के तहत अमेरिकी सेना सितंबर के अंत तक इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी खत्म कर सकती है। अमेरिकी और इराकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। यह फैसला उस लंबे सैन्य अभियान के अंत की ओर इशारा करता है, जो साल 2003 में इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के खिलाफ अमेरिकी हमले से शुरू हुआ था।
करीब 23 वर्षों तक इराक में मौजूद रहने के बाद अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दौरान अमेरिका ने इराक में कई बड़े सैन्य अभियान चलाए, जिनमें सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने से लेकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ कार्रवाई तक शामिल रही।
التقى رئيس مجلس الوزراء السيد علي فالح الزيدي، اليوم الثلاثاء، الرئيس الأمريكي السيد دونالد ترامب، في البيت الأبيض بالعاصمة الأمريكية واشنطن، حيث جرى بحث سبل تعزيز العلاقات الثنائية وتوسعة التعاون الاقتصادي، وفرص مشاركة الشركات الأمريكية في مشاريع التنمية بالعراق، خاصة في مجال… pic.twitter.com/CY7wcQDjtQ
— المكتب الإعلامي لرئيس الوزراء 🇮🇶 (@IraqiPMO) July 14, 2026
मंगलवार को व्हाइट हाउस में इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ एक मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है। ट्रंप ने कहा, “हमें नहीं लगता कि अब हमें वहां मिलिट्री की जरूरत है।” उन्होंने इस दौरान इराक के साथ बढ़ते आर्थिक संबंधों और तेल कंपनियों के साथ सहयोग का भी जिक्र किया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इराक से सैनिकों की वापसी एक चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत होगी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को समाप्त करना है। हालांकि, दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग और सुरक्षा संबंधों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाएगा।
Iraqi Prime Minister Ali al-Zaidi told reporters today that “U.S. forces will be out of Iraq” by September 30 of this year. As of right now, in line with the agreement announced in 2024 by the Higher Coordinating Committee, U.S. forces are largely sequestered to areas within… pic.twitter.com/zrPnEOMSEX
— OSINTdefender (@sentdefender) July 14, 2026
अमेरिकी सेना की इराक में मौजूदगी की शुरुआत साल 2003 में हुई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में अमेरिका ने इराक पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। अमेरिका का आरोप था कि सद्दाम हुसैन की सरकार के पास बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियारों का कार्यक्रम था, हालांकि बाद में ऐसे हथियारों के प्रमाण नहीं मिले।
सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के बाद अमेरिका ने इराक में लंबे समय तक सैन्य और राजनीतिक भूमिका निभाई। साल 2011 में अमेरिका ने बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था, लेकिन 2014 में इस्लामिक स्टेट के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बाद अमेरिकी सेना दोबारा इराक पहुंची।
ISIS के खिलाफ अभियान में अमेरिकी सेना ने इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी और हवाई सहायता उपलब्ध कराई। इस अभियान के जरिए आतंकी संगठन के कब्जे वाले कई इलाकों को वापस हासिल किया गया।
हाल के वर्षों में इराक सरकार लगातार अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इराकी अधिकारियों का कहना है कि देश अब अपने सुरक्षा मामलों को खुद संभालने की स्थिति में है। इसी वजह से अमेरिकी सैन्य मिशन को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
अमेरिका और इराक के बीच संबंध अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों देश आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी बैठक के दौरान इराक के तेल क्षेत्र में बढ़ते निवेश और अमेरिकी कंपनियों की भूमिका का उल्लेख किया।
इराक दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में वहां ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को लेकर अमेरिका समेत कई देशों की रुचि बनी हुई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में दोनों देशों के संबंध आर्थिक साझेदारी के आधार पर आगे बढ़ सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर इराक में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कुछ राजनीतिक समूह लंबे समय से विदेशी सैन्य मौजूदगी का विरोध करते रहे हैं, जबकि कुछ लोग सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अमेरिकी सहयोग जारी रखने के पक्ष में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी सेना की वापसी के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा होगी। हालांकि, इराकी सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी क्षमता में काफी सुधार किया है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और आतंकी समूहों की गतिविधियां अब भी चुनौती बनी हुई हैं।
अमेरिका के लिए भी यह फैसला मध्य-पूर्व में उसकी सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने कई क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी की समीक्षा की है और स्थानीय सहयोगियों को अधिक जिम्मेदारी देने की नीति अपनाई है।
इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास और निवेश को भी प्राथमिकता देने की बात कही।
यदि तय समय के अनुसार अमेरिकी सेना सितंबर के अंत तक इराक छोड़ देती है, तो यह अमेरिका के सबसे लंबे विदेशी सैन्य अभियानों में से एक के समाप्त होने का प्रतीक होगा। 2003 में शुरू हुआ यह अभियान अब एक नए राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के दौर में प्रवेश कर सकता है।





