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UK मार्केट में भारतीय उत्पादों की आसान एंट्री

Kavita2
15 July 2026 10:30 AM IST
UK मार्केट में भारतीय उत्पादों की आसान एंट्री
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नई दिल्ली : भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने वाली बड़ी पहल अब आधिकारिक रूप से लागू हो गई है। इंडिया-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और सोशल सिक्योरिटी पर दोनों देशों के बीच हुआ समझौता प्रभावी हो गया है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए नया ढांचा तैयार होगा।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह समझौता भारत के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। इसके तहत भारतीय निर्यात का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटेन के बाजार में जीरो-ड्यूटी एक्सेस प्राप्त करेगा। साथ ही यह समझौता दोनों देशों के बीच होने वाले कुल व्यापार मूल्य का करीब 100 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।



वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा। इससे भारतीय उद्योगों को ब्रिटेन के बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस डील से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को फायदा पहुंचेगा।

CETA के लागू होने के बाद भारत के श्रम आधारित उद्योगों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। इनमें कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और अन्य विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्यम जुड़े हुए हैं, जिन्हें ब्रिटेन के बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है।


विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारतीय उत्पादों पर ब्रिटेन में लगने वाले आयात शुल्क के कारण कई क्षेत्रों में लागत बढ़ जाती थी। अब शुल्क कम या समाप्त होने से भारतीय कंपनियां ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेच सकेंगी। इससे निर्यात बढ़ने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

इस समझौते का लाभ केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। आईटी, वित्तीय सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और अन्य सेवा क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।

भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। दोनों देशों ने इस समझौते के जरिए व्यापारिक बाधाओं को कम करने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। CETA दोनों देशों के कारोबारियों को एक अधिक स्थिर और पारदर्शी व्यापार वातावरण उपलब्ध कराएगा।

सोशल सिक्योरिटी समझौता भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य दोनों देशों में काम करने वाले पेशेवरों और कर्मचारियों से जुड़े सामाजिक सुरक्षा योगदान के मुद्दों को आसान बनाना है। इससे भारत और ब्रिटेन में काम करने वाले कर्मचारियों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा भुगतान जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रिटेन का बाजार भारतीय छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर खोल सकता है। बेहतर बाजार पहुंच मिलने से MSME क्षेत्र में उत्पादन, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।

ब्रिटेन भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। भारत से बड़ी मात्रा में कपड़ा, मशीनरी, दवाएं, रत्न एवं आभूषण और अन्य उत्पाद ब्रिटेन भेजे जाते हैं। नई व्यापार व्यवस्था के बाद इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, ब्रिटेन की कंपनियों के लिए भी भारत में निवेश और कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। दोनों देशों के बीच बेहतर व्यापारिक माहौल बनने से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए पारस्परिक लाभ वाला कदम साबित हो सकता है।

उद्योग जगत ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। कारोबारियों का कहना है कि जीरो-ड्यूटी मार्केट एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए ऐसे समझौते बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच मिलेगी और निर्यात आधारित विकास को गति मिल सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि समझौते का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योगों को गुणवत्ता मानकों, उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना होगा। ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में सफल होने के लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपने उत्पाद तैयार करने होंगे।

भारत सरकार का कहना है कि यह समझौता देश के व्यापार विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कुल मिलाकर, भारत-UK CETA और सोशल सिक्योरिटी समझौते के लागू होने से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नया अध्याय शुरू हो गया है। 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को जीरो-ड्यूटी बाजार पहुंच मिलने से घरेलू उद्योगों, छोटे कारोबारियों और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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