
वर्ल्ड : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 26% पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और वैश्विक मंदी की आशंका तेज हो गई है।
अमेरिकी बाजारों में गिरावट क्यों आई?
ट्रंप के इस टैरिफ फैसले से वैश्विक व्यापार युद्ध की संभावना बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि यह कदम अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ाएगा, निर्यात प्रभावित करेगा और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ाएगा। इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों पर साफ नजर आया:
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 800 अंक की गिरावट दर्ज की गई।
S&P 500 और NASDAQ में भी करीब 2.5% की गिरावट आई।
टेक कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, क्योंकि भारत और चीन पर लगे टैरिफ से टेक सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
एशियाई बाजार भी हुए प्रभावित
अमेरिकी बाजारों की गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, क्योंकि भारत और चीन पर टैरिफ से वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा।
भारतीय शेयर बाजार (BSE Sensex, Nifty 50) में 500 अंकों की गिरावट देखी गई।
शंघाई स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में भी भारी गिरावट आई।
जापान के निक्केई 225 इंडेक्स में 1.8% की गिरावट देखी गई।
मंदी की आशंका क्यों बढ़ी?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह व्यापार युद्ध बढ़ता है, तो इससे वैश्विक व्यापार बाधित होगा और निवेशकों का भरोसा कमजोर होगा।
महंगाई बढ़ेगी – अमेरिका में उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे खरीदारी घटेगी।
कंपनियों के मुनाफे पर असर – टैरिफ बढ़ने से आयात-निर्यात पर असर पड़ेगा, जिससे कंपनियों की आमदनी घटेगी।
ब्याज दरों पर असर – अगर बाजार में अनिश्चितता बनी रही, तो फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में बदलाव करना पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
निवेशक अब यह देख रहे हैं कि अमेरिका और प्रभावित देश (भारत, चीन, यूरोपीय संघ) इस टैरिफ फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। अगर कोई व्यापार समझौता नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि बाजार की चिंता को दूर करने के लिए जल्द ही व्यापारिक वार्ता की जा सकती है। अगर कोई राजनयिक समाधान नहीं निकला, तो वैश्विक मंदी की आशंका और बढ़ सकती है।





