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बढ़ते खर्च और शिक्षा संकट पर बवाल, यूरोप के कई देशों में प्रदर्शन

nidhi
18 Oct 2026 6:41 AM IST
बढ़ते खर्च और शिक्षा संकट पर बवाल, यूरोप के कई देशों में प्रदर्शन
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फ्रांस-बेल्जियम में पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
पेरिस/ब्रुसेल्स: बढ़ती महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर यूरोप के कई देशों में शनिवार को बड़े प्रदर्शन हुए। फ्रांस और बेल्जियम में कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। फ्रांस के कई शहरों से आगजनी, दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। इटली में भी विरोध मार्च के दौरान हिंसा हुई, जबकि पुर्तगाल में आवास और जीवनयापन के बढ़ते खर्च के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे। अलग-अलग देशों में हुए इन प्रदर्शनों के मुद्दों में आर्थिक दबाव प्रमुख रहा।
फ्रांस में पेरिस, मार्सेय, लियोन और लील सहित कई शहरों में लोगों ने बढ़ते जीवनयापन खर्च के खिलाफ आवाज उठाई। विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ समूहों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव हुआ। कई जगह आग लगाई गई और सरकारी इमारतों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शन से पहले ही प्रशासन ने हिंसा की आशंका को देखते हुए देशभर में करीब 10 हजार पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान तैनात किए थे। इनमें लगभग पांच हजार की तैनाती पेरिस में की गई थी।
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी केवल वस्तुओं की बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं थी। शिक्षा के लिए संसाधनों की कमी, स्कूलों की स्थिति और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष भी आंदोलन में दिखाई दिया। छात्रों के साथ श्रमिक संगठनों और पुराने ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी विरोध में भाग लिया। कई स्थानों पर मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ शहरों में हिंसक घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
फ्रांस में आंदोलन पिछले कई सप्ताह से जारी छात्र प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में व्यापक हुआ है। शुरुआत में स्कूलों और शिक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर आवाज उठी थी। बाद में असमानता, सरकारी खर्च और जीवन स्तर से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। शनिवार को सड़कों पर उतरे लोगों में अलग-अलग मांगों वाले समूह मौजूद थे। इस कारण प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर आर्थिक नीतियों और रोजमर्रा की कठिनाइयों के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप लेते दिखाई दिए।
बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भी सैकड़ों लोगों, खासकर युवाओं, ने प्रदर्शन किया। कुछ उपद्रवियों ने एक कार पलट दी, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारें कीं। बेल्जियम के गृह मंत्री बर्नार्ड क्विंटिन ने हिंसा की निंदा की और सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने की बात कही। देश के पूर्वी शहर लीज में भी विरोध हुआ। वहां छात्रों की चिंताओं में शिक्षा का बढ़ता खर्च और पढ़ाई की सामग्री हासिल करने में कठिनाई शामिल रही है।
इटली के मिलान में युद्धों और बढ़ते जीवनयापन खर्च के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन भी हिंसक हो गया। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे मार्च के दौरान नकाबपोश लोगों ने पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकीं। दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने पानी की बौछारों तथा आंसू गैस से स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की। कम से कम दो पुलिसकर्मियों के घायल होने और लगभग 50 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली।
पुर्तगाल में विरोध का प्रमुख मुद्दा आवास की बढ़ती लागत रहा। राजधानी लिस्बन में प्रदर्शनकारियों ने महंगे किराये, आवास की कमी और कम वेतन को लेकर नाराजगी जताई। यहां के प्रदर्शन यूरोप के दूसरे देशों में दिखाई दे रहे उस असंतोष से जुड़े नजर आए, जिसमें लोग आय और जरूरी खर्चों के बीच बढ़ते अंतर पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, विभिन्न देशों के प्रदर्शनों की स्थानीय वजहें और आयोजन अलग-अलग थे।
फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए लोगों और संपत्तियों के सम्मान की अपील की है। दूसरी ओर, प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के बल प्रयोग को लेकर भी सवाल उठे हैं। आर्थिक मांगों के साथ कानून व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। सरकारों के सामने अब हिंसक घटनाओं से निपटने के साथ उन शिकायतों का समाधान खोजने की चुनौती है, जिनके कारण बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं।
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