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पश्चिम बंगाल
कोलकाता भगदड़ में मां को खोने वाले बेटे ने बयां किया खौफनाक मंजर
nidhi
18 Oct 2026 6:30 AM IST

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‘आंखों के सामने मां को मरते देखा’, बेटे ने बयां किया दर्द
कोलकाता: दुर्गा पूजा की रौनक के बीच उत्तरी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पूजा पंडाल में शनिवार शाम हुई भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में अपनी मां को खोने वाले 25 वर्षीय सोनू पाल की आपबीती उस भयावह स्थिति को सामने लाती है, जिसमें श्रद्धालुओं को खुद को संभालने तक का मौका नहीं मिला। कुमारटुली निवासी सोनू अपनी मां के साथ पूजा देखने पहुंचे थे। अचानक बारिश शुरू हुई और पंडाल के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ने लगा। कुछ ही देर में वह खुद भी लोगों के नीचे दब गए। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी मां को आंखों के सामने मरते देखा।”
बारिश के कारण पंडाल के भीतर मौजूद लोग बाहर नहीं निकलना चाहते थे। दूसरी तरफ प्रवेश द्वार के पास खड़े लोग भीगने से बचने के लिए अंदर आने की कोशिश कर रहे थे। इससे एक ही स्थान पर लोगों का दबाव लगातार बढ़ता गया। उनके बयान के अनुसार, भीड़ में खड़े लोगों के लिए अपना संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया। धक्का बढ़ने पर कुछ लोग गिरे और फिर दूसरे लोग भी उनके ऊपर गिरते चले गए। सोनू भी इसी भीड़ में फंस गए। किसी तरह संभलने के बाद वह मां तक पहुंचे, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
यह घटना 17 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजकर 40 मिनट पर गिरीश पार्क थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस के अनुसार, बारिश के दौरान पूजा पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच निकास द्वार के पास भगदड़ की स्थिति बनी। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल, आपदा प्रबंधन दल और एंबुलेंस कर्मियों को मौके पर भेजा गया। घायलों को निकालकर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
रविवार सुबह तक सामने आई जानकारी के अनुसार, हादसे में मृतकों की संख्या 19 पहुंच गई थी और करीब 25 घायलों का उपचार चल रहा था। शुरुआती सूचनाओं में मृतकों की संख्या कम बताई गई थी। अस्पताल पहुंचाए गए घायलों में महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल हैं। घटना के बाद पंडाल में दर्शकों का प्रवेश बंद कर दिया गया। उत्सव के लिए जुटे परिवार अचानक अपने साथ आए लोगों की तलाश और उनकी स्थिति जानने की चिंता में घिर गए।
अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी घटनास्थल पर भारी भीड़ और लोगों के गिरने का जिक्र किया। एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी बेटी और नातिन घायल हुई हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मोटरसाइकिलों की मदद भी ली गई। इन बयानों से पता चलता है कि हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकालने और चिकित्सा सहायता तक पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण और हादसे के पूरे घटनाक्रम की जांच अभी जारी है।
हादसे के बाद पंडाल में आने और बाहर निकलने के रास्तों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने संकरे प्रवेश और निकास मार्ग तथा बारिश के बीच बढ़ी भीड़ को परेशानी की बड़ी वजह बताया। प्रारंभिक विवरण में एक घोषणा और सीटी बजाए जाने के बाद अफरा-तफरी बढ़ने की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है। फिलहाल किसी एक कारण को हादसे की अंतिम वजह मानने के बजाय भीड़ के दबाव, रास्तों और उस समय की व्यवस्थाओं की पड़ताल की जा रही है।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों के लिए पांच लाख रुपये की सहायता तथा इलाज का खर्च उठाने का ऐलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। सोनू की आपबीती इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द सामने रखती है। मां के साथ दर्शन करने पहुंचे युवक ने खुद भीड़ में दबने और फिर उन्हें खो देने की बात कही है। हादसे की जांच से व्यवस्थाओं और घटनाक्रम से जुड़े सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल अस्पताल में भर्ती लोगों का उपचार और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
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