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Pakistan में हाहाकार: नीतिगत फैसलों में देरी से गहराया ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल खत्म होने का डर

Gulabi Jagat
16 July 2026 4:02 PM IST
Pakistan में हाहाकार: नीतिगत फैसलों में देरी से गहराया ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल खत्म होने का डर
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Islamabad : 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान एक और ईंधन सप्लाई संकट के जोखिम का सामना कर रहा है। पेट्रोल का घटता भंडार, आयात में देरी और पॉलिसी से जुड़ी अड़चनें देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा रही हैं।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, इंडस्ट्री के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पेट्रोल का स्टॉक गिरकर लगभग 379,000 टन रह गया है (इसमें लोकल रिफाइनरियों से मिलने वाली सप्लाई भी शामिल है)। खपत की मौजूदा दर के हिसाब से यह स्टॉक सिर्फ़ दो हफ़्ते के लिए ही काफ़ी है। जुलाई के पहले पखवाड़े में मांग में भारी उछाल आया है; पेट्रोल की रोज़ाना बिक्री अनुमानों और पिछले साल के आंकड़ों से ज़्यादा रही है, जिसकी वजह ईंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद है। खपत बढ़ने से पहले से ही सीमित भंडार पर दबाव बढ़ गया है, जबकि तय समय पर ईंधन आयात में देरी ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

हालांकि आने वाले दिनों में लगभग 153,000 टन पेट्रोल लेकर शिपमेंट आने की उम्मीद है, लेकिन पिछले महीने कम से कम एक तय कार्गो को मंज़ूरी नहीं मिल पाई और कई तेल मार्केटिंग कंपनियों से जुड़े एक अन्य आयात को रद्द कर दिया गया, जिससे सप्लाई और भी तंग हो गई। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब अल-मंडेब (Bab el-Mandeb) के आसपास तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में रुकावटों ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। हालांकि, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का तर्क है कि घरेलू प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियां ही संकट को और खराब करने वाले मुख्य कारक हैं।

तेल मार्केटिंग कंपनियों ने सरकार से लगभग 66.7 अरब रुपये के लंबित 'प्राइस डिफरेंशियल क्लेम' (PDC) को तुरंत जारी करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि भुगतान में देरी ने नए ईंधन आयात के लिए फंड जुटाने की उनकी क्षमता को कमज़ोर कर दिया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि बकाया राशि से लगभग 250,000 टन पेट्रोल खरीदा जा सकता है, जो कई आयात कार्गो के बराबर है और इससे राष्ट्रीय भंडार काफी मज़बूत होगा।

अधिकारियों ने WeBOC सिस्टम के ज़रिए कस्टम क्लीयरेंस में देरी की ओर भी इशारा किया है और चेतावनी दी है कि बंदरगाहों पर आयातित ईंधन की धीमी प्रोसेसिंग से अंदरूनी बाज़ारों में सप्लाई बाधित हो सकती है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि रिफाइनरी में लगातार उत्पादन के कारण डीज़ल का स्टॉक काफी हद तक स्थिर बना हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर अनिश्चितता बनी रहती है, तो घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) या जमाखोरी से जल्द ही कमी पैदा हो सकती है।

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