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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणियों को भारत ने कड़े शब्दों में खारिज किया है। विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को बेबुनियाद और अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि यह भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप के समान है। मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय पर चुनिंदा मामलों में प्रतिक्रिया देने का आरोप भी लगाया।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई करती हैं
UN की टिप्पणियों पर भारत ने जताई नाराजगी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त की थी।OHCHR के प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की थी।उन्होंने कहा था कि विरोध-प्रदर्शनों पर किसी भी तरह की पाबंदी आवश्यक और आनुपातिक होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार करते समय अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया।संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की भी अपील की थी।
विदेश मंत्रालय ने लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सभी देशों के मामलों में समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि OHCHR भारत में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों पर सार्वजनिक टिप्पणी करता है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में ऐसी घटनाओं पर उसकी प्रतिक्रिया समान नहीं होती।जायसवाल के मुताबिक, इस तरह का चयनात्मक रवैया अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अंतरराष्ट्रीय संगठन इसी प्रकार प्रतिक्रिया देते रहे, तो बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति देशों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान में सुरक्षित
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने तथा अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाएं नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती हैं।हालांकि, विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इन अधिकारों का उपयोग सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों के अधीन होता है।भारत सरकार का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की थी।
CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई थीं गिरफ्तारियां
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाता प्रभावित हुए हैं।हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने कुछ स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
रविवार को भी भारत ने दिया था जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार, 11 अक्टूबर को भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणियों पर भारत का पक्ष रखा था।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो बयान में कहा था कि भारत में कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानूनी प्रावधानों के अनुसार काम करती हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शिकायत होने पर न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से राहत प्राप्त करने का अधिकार है।विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर टिप्पणी करनी चाहिए।
मानवाधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था पर बहस
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों ने शांतिपूर्ण सभा के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानूनी आधार पर उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में इस बात पर जोर दिया गया है कि विरोध-प्रदर्शन पर लगाई जाने वाली पाबंदियां उचित और परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए।फिलहाल इस विवाद में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और संयमित पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। दूसरी ओर, भारत सरकार ने अपनी कार्रवाई को कानून के अनुरूप बताते हुए OHCHR की आलोचना को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।
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