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नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित पहले बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों के संवाद में बांग्लादेश समेत सभी सात सदस्य देशों ने हिस्सा लिया। नई दिल्ली में 13 अक्टूबर 2026 को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बैठक में बांग्लादेश की भागीदारी की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार, 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि बिम्सटेक गृह मंत्रियों की पहली बैठक में बांग्लादेश ने भी भाग लिया। इसके अलावा संगठन के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहे।जायसवाल ने कहा कि बैठक की मेजबानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। इस दौरान सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सीमा पार होने वाले संगठित अपराधों से निपटने के उपायों पर चर्चा की।
बिम्सटेक का पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है। इस क्षेत्रीय संगठन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा संबंधी सहयोग बढ़ाना है।नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि बिम्सटेक के इतिहास में पहली बार सदस्य देशों के गृह मंत्रियों का औपचारिक संवाद आयोजित किया गया। बैठक में सुरक्षा से जुड़े साझा खतरों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति दोहराई और सदस्य देशों से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मिलकर काम करने का आह्वान किया।अमित शाह ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्र के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों को आश्रय देने, भर्ती करने, प्रशिक्षण देने, धन जुटाने या पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियां संचालित करने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा को सभी सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारी बताया।
बैठक के अंत में अपनाए गए दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी स्वरूपों की निंदा की गई। सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और कट्टरपंथ से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।घोषणापत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध, संगठित अपराध और अवैध हथियारों के कारोबार को रोकने पर भी विशेष जोर दिया गया। सदस्य देशों ने इन अपराधों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में मानव तस्करी रोकने के लिए बिम्सटेक कन्वेंशन को भी मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मानव तस्करी की रोकथाम, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों के संरक्षण तथा पुनर्वास के लिए सहयोग को मजबूत करना है।इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कार्ययोजना को स्वीकृति दी गई। सदस्य देशों ने ड्रग तस्करी से जुड़े नेटवर्क और अवैध आपूर्ति के रास्तों पर रोक लगाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए क्षमता निर्माण से संबंधित समझौता ज्ञापन को भी मंजूरी मिली। इसके तहत विशेषज्ञों के प्रशिक्षण, वित्तीय अपराधों की जांच और बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाएगा।बिम्सटेक देशों ने अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकने के लिए भी कार्ययोजना अपनाई। इस पहल का उद्देश्य गैरकानूनी तरीके से धन के हस्तांतरण के स्रोतों और रास्तों की पहचान करना तथा संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना है।
बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय तैयारियों को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने आपदा प्रबंधन, चेतावनी प्रणाली, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और सूचना साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता जताई।विदेश मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली घोषणापत्र क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के प्रति बिम्सटेक देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसमें मौजूदा समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा सुरक्षा संबंधी सहयोग को व्यावहारिक रूप देने पर जोर दिया गया है।
इस बीच बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है। इससे पहले बांग्लादेश के गृह मंत्री सालाहुद्दीन अहमद के व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल नहीं होने की खबरें आई थीं। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश ने संगठन के अन्य सदस्य देशों के साथ बैठक में भाग लिया था। मंत्री की व्यक्तिगत अनुपस्थिति और देश के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी दो अलग विषय हैं।भारत में आयोजित इस पहली बैठक के जरिए बिम्सटेक देशों ने सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक नया संस्थागत कदम उठाया है। अब दिल्ली घोषणापत्र में तय प्रतिबद्धताओं को लागू करने, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्ययोजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान रहेगा।
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