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Beijing बीजिंग। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चीन सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ता यांग ली को बार-बार चिकित्सकीय उपचार से वंचित किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चीनी अधिकारियों से यांग ली और उनके परिवार के खिलाफ उत्पीड़न व डराने-धमकाने की कार्रवाई रोकने और उन्हें तत्काल इलाज की अनुमति देने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने अपने बयान में कहा, “यांग ली की गिरफ्तारी और उन पर आरोप तय किया जाना इस बात का संकेत है कि अधिकारी उन्हें अपनी वैध शिकायतों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांगने से रोकना चाहते हैं। यह उत्पीड़न और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इसके साथ उन्हें चिकित्सा उपचार से भी वंचित किया जा रहा है।” यह जानकारी जुरिस्ट न्यूज की रिपोर्ट में दी गई है।
यांग ली चीन के जिंतान क्षेत्र की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो लंबे समय से आवास और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही हैं। उन्होंने अवैध भूमि अधिग्रहण, जबरन बेदखली और मकानों को गिराने जैसे मामलों पर खुलकर आवाज उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों के विस्थापन और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा न मिलने जैसे मुद्दों को भी उजागर किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 18 जनवरी को जब यांग ली इलाज के लिए बीजिंग जा रही थीं, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। घर से निकलते ही यांग ली और उनके पिता को सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जबरन जिंतान लॉ एनफोर्समेंट केस मैनेजमेंट सेंटर ले जाया। यह गिरफ्तारी उनकी पिछली हिरासत से रिहा होने के करीब पांच दिन बाद हुई। इससे पहले उन्हें 11 से 13 जनवरी तक हिरासत में रखा गया था।
बताया गया है कि वर्ष 2025 में हिरासत में लिए जाने के बाद से यांग ली को अब तक किसी भी प्रकार का चिकित्सा उपचार नहीं मिल पाया है। अगस्त 2024 में उन्हें एक गंभीर बीमारी का पता चला था, जिसके लिए विशेष इलाज जरूरी बताया गया था। इसके बावजूद हिरासत केंद्र के अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी। 30 दिसंबर को रिहाई के बाद भी उनकी आवाजाही पर पाबंदी लगी रही और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स (एफएलडी) ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि यांग ली को उनके मानवाधिकार कार्यों के कारण निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें चिकित्सा सुविधा से वंचित करना भूमि अधिकारों से जुड़े कथित दुरुपयोगों को उजागर करने के बदले “प्रतिशोध की एक सुनियोजित नीति” का हिस्सा प्रतीत होता है।
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