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ईरान को ट्रंप की चेतावनी शांति समझौता नहीं किया तो होगा बर्बाद

nidhi
23 Sept 2026 7:53 AM IST
ईरान को ट्रंप की चेतावनी शांति समझौता नहीं किया तो होगा बर्बाद
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ईरान पर ट्रंप का कड़ा संदेश समझौता
न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर कहा कि उनके सामने बड़ा फैसला है। उन्होंने समझौते का रास्ता अपनाने या ईरान के खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई करने की बात कही। ट्रंप ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए यहां तक कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान को तबाह करने का विकल्प चुन सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देंगे। ट्रंप के मुताबिक उनके प्रशासन ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम समाप्त करने और आर्थिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया था, लेकिन तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ईरान पर बनाए गए सैन्य और आर्थिक दबाव ने उसकी स्थिति कमजोर की है। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की अपील की। हालांकि उनके संबोधन में कड़ी चेतावनी के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला दिखाई दिया। ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बनी हुई है।
UNGA से इतर ट्रंप ने बाद में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और उन्हें उम्मीद है कि आखिरकार कोई समझौता हो जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष मंगलवार को भी संपर्क में थे। हालांकि उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि किसी भी समझौते की बुनियादी शर्त यही होगी कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सके।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और सैन्य टकराव ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र में उनके संबोधन का बड़ा हिस्सा ईरान और उसके परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित रहा। एक ओर उन्होंने बेहद कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी, वहीं दूसरी ओर समझौते की संभावना भी जताई। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच जारी संपर्क किसी कूटनीतिक समझौते तक पहुंचता है या तनाव आगे और बढ़ता है।
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