
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान युद्ध के मुद्दे पर घरेलू राजनीति में बड़ा झटका लगा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने सीनेट में ट्रंप प्रशासन के 1.15 ट्रिलियन डॉलर के वार्षिक रक्षा नीति विधेयक को आगे बढ़ने से रोक दिया। डेमोक्रेट सांसदों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए इस बिल का विरोध किया।
यह रक्षा विधेयक अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम कानून माना जाता है। इसे हर साल नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (NDAA) के रूप में पेश किया जाता है, जिसमें सेना के बजट, रक्षा नीतियों और सैन्य गतिविधियों के लिए दिशा तय की जाती है।
डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति पैदा की और अमेरिकी सैनिकों को जोखिम में डाला। उनका आरोप है कि इस सैन्य कार्रवाई के पीछे कोई स्पष्ट रणनीति और बाहर निकलने की योजना नहीं है।
सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और न्यूयॉर्क से सीनेटर चक शूमर ने ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने बिना कांग्रेस की अनुमति, बिना स्पष्ट रणनीति और बिना किसी योजना के युद्ध शुरू किया। उन्होंने रक्षा विधेयक के खिलाफ मतदान करने की घोषणा की।
हालांकि मतदान के दौरान रक्षा विधेयक के पक्ष में ज्यादा वोट पड़े। बिल के समर्थन में 50 वोट मिले, जबकि 46 सांसदों ने इसका विरोध किया। लेकिन 100 सदस्यों वाली सीनेट में किसी भी बड़े विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 60 वोटों की जरूरत होती है। पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक आगे नहीं बढ़ सका।
डेमोक्रेट्स का कहना है कि अमेरिका को किसी भी बड़े सैन्य अभियान में जाने से पहले संसद की मंजूरी लेनी चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध जैसे फैसले केवल राष्ट्रपति के स्तर पर नहीं लिए जाने चाहिए, बल्कि इसमें कांग्रेस की भूमिका भी जरूरी है।
वहीं, ट्रंप प्रशासन का पक्ष है कि ईरान से जुड़े सुरक्षा खतरों को देखते हुए सैन्य कदम उठाना जरूरी था। प्रशासन का मानना है कि देश की सुरक्षा और वैश्विक हितों की रक्षा के लिए मजबूत कार्रवाई आवश्यक है।
रक्षा विधेयक का रुकना ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में विदेश नीति और सैन्य फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
अब इस विधेयक को लेकर आगे की रणनीति पर नजर रहेगी। अमेरिकी संसद में दोनों दलों के बीच सहमति बनती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में तय करेगा कि रक्षा बजट और सैन्य नीतियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण कानून का भविष्य क्या होगा। ईरान युद्ध को लेकर जारी राजनीतिक टकराव ने ट्रंप प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।





