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ट्रंप का ईरान पर बड़ा बयान: "हम हमला भी कर सकते हैं, और नहीं भी...
Shantanu Roy
18 Jun 2025 8:34 PM IST

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Washington. वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सैन्य कार्रवाई को लेकर बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने ईरान को चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि "हम ईरान पर हमला कर सकते हैं और कर भी नहीं सकते, यह हमारे ऊपर है।" ट्रंप के इस बयान को मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के रिश्तों के आगामी समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।
"वार्ता दो हफ़्ते पहले क्यों नहीं की?" - ट्रंप ने जताई नाराज़गी
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता था, तो उसे यह क़दम दो हफ्ते पहले ही उठा लेना चाहिए था। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा, "इतनी तबाही नहीं होती, अगर वार्ता समय पर होती।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "वार्ता देर से भी की जा सकती है, लेकिन तब तक बहुत कुछ बर्बाद हो चुका होगा।" ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे ईरान के मौजूदा संकट को टालने योग्य मानते हैं, लेकिन साथ ही इसे टालने में देरी के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हैं।
मैं ईरान पर हमला कर भी सकता हूँ नहीं भी कर सकता हूँ… ईरान वार्ता चाहता है तो मेरा करना है दो हफ़्ते पहले क्यों नहीं कर लिया… इतनी तबाही नहीं होती… वार्ता देर से भी की जा सकती है -ट्रंप
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) June 18, 2025
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ईरान-अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि
ईरान और अमेरिका के रिश्तों में पिछले एक दशक में कई बार तनाव चरम पर पहुंच चुका है। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका को बाहर कर लिया था, जिसे ओबामा प्रशासन ने 2015 में हस्ताक्षर किया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ते चले गए। ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों, विशेष रूप से तेल निर्यात और बैंकिंग पर लगे प्रतिबंध, ने वहां की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया। इन प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने भी अपनी यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को तेज कर दिया, जिससे वैश्विक समुदाय की चिंता और बढ़ गई।
ट्रंप की बयानबाज़ी: दबाव बनाने की रणनीति या राजनीतिक चाल?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान महज़ एक कूटनीतिक चेतावनी नहीं, बल्कि दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चुनावी मौसम में ट्रंप अक्सर अपनी आक्रामक विदेश नीति को उभारते हैं, जिससे उनका मज़बूत नेतृत्वकर्ता वाला चेहरा सामने आए। हालांकि, उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका अब भी डिप्लोमैसी के दरवाज़े बंद नहीं करना चाहता, लेकिन वह इसे अपनी शर्तों पर करना चाहता है। ट्रंप के बयान "हम हमला कर सकते हैं और नहीं भी कर सकते" में दो टूक संदेश छुपा है कि ईरान को अब अमेरिका की शर्तों पर समझौते की टेबल पर आना होगा।
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