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Trump Tariff : भारत के लिए निर्णय मुश्किल था : ट्रंप

Uma Verma
3 April 2025 8:34 AM IST
Trump Tariff : भारत के लिए निर्णय मुश्किल था : ट्रंप
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अमेरिका | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ 26% पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाने का फैसला किया, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया और कहा कि यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था।

भारत पर टैरिफ क्यों लगाया गया?

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे आयात शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। ट्रंप की नई नीति के तहत, अमेरिका उन्हीं देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा, जितना वे अमेरिकी सामानों पर लगाते हैं। इसी सिद्धांत के आधार पर भारत को भी 26% अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में लाया गया।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा:

"मैं पीएम मोदी का सम्मान करता हूं और वे मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन अमेरिका के हितों की रक्षा करना मेरी प्राथमिकता है। यह निर्णय कठिन था, लेकिन निष्पक्ष व्यापार (Fair Trade) के लिए यह जरूरी था।"

किन सेक्टर्स पर असर पड़ेगा?

इस 26% टैरिफ से भारत के निम्नलिखित उद्योगों पर असर पड़ सकता है:

स्टील और एल्युमिनियम – अमेरिका भारत से भारी मात्रा में स्टील और एल्युमिनियम खरीदता है, इस नए टैरिफ से यह महंगा हो सकता है।

फार्मास्युटिकल्स – भारत, अमेरिका को सबसे ज्यादा दवाएं निर्यात करता है, इस फैसले से भारतीय दवा उद्योग को झटका लग सकता है।

टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल पार्ट्स – भारतीय कपड़ा और ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री पर भी टैरिफ बढ़ने का असर पड़ सकता है।

भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी?

भारत सरकार इस फैसले पर विचार कर रही है और जल्द ही व्यापार वार्ता शुरू करने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जवाबी टैरिफ लगाने के बजाय अमेरिका के साथ बातचीत कर इस मुद्दे को हल करने की कोशिश करेगा।

क्या यह भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डालेगा?

हालांकि यह टैरिफ व्यापारिक स्तर पर कुछ अस्थायी झटके जरूर देगा, लेकिन भारत और अमेरिका के कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध काफी मजबूत हैं। ट्रंप ने भी यह स्पष्ट किया कि वे मोदी को एक मजबूत और सम्मानित नेता मानते हैं और यह निर्णय व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि व्यापारिक संतुलन बनाए रखने के लिए लिया गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इस टैरिफ के खिलाफ कोई जवाबी कदम उठाता है या राजनयिक वार्ता के जरिए समाधान निकालता है।

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